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IND vs AUS: 'जब विराट आउट हुए तो भीड़ की खामोशी सबसे ज्यादा...' भारतीय फैंस के जख्मों पर कमिंस ने छिड़का नमक

Mon, 20 Nov 2023 12:27 PM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद

सार

रविवार को अहमदाबाद में अपने देश को छठा एकदिवसीय विश्व कप दिलाने और विश्व कप जीतने वाले पांचवें ऑस्ट्रेलियाई कप्तान बनने के बाद कमिंस ने स्वीकार किया कि उन्हें वनडे प्रारूप से फिर से प्यार हो गया है।
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पैट कमिंस ने कोहली को आउट किया था - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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विश्व कप फाइनल में जब पैट कमिंस ने विराट कोहली को आउट किया तो अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में एक लाख 30 हजार दर्शकों में एकदम से खामोशी छा गई थी। ऐसा लगा था कि मैदान में कोई नहीं बैठा है। समर्थकों की इस चुप्पी का पैट कमिंस ने मजाक उड़ाया है और भारतीय फैंस के जख्मों पर नमक छिड़कते हुए कहा कि विराट के आउट होने पर दर्शकों की खामोशी मैच के सबसे शानदार पल में से एक था।
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रविवार को अहमदाबाद में अपने देश को छठा एकदिवसीय विश्व कप दिलाने और विश्व कप जीतने वाले पांचवें ऑस्ट्रेलियाई कप्तान बनने के बाद कमिंस ने स्वीकार किया कि उन्हें वनडे प्रारूप से फिर से प्यार हो गया है। ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम के कप्तान पैट कमिंस अहमदाबाद में साबरमती नदी क्रूज बोट पर आईसीसी विश्व कप ट्रॉफी के साथ पोज भी दिया।

विराट 54 रन बनाकर बल्लेबाजी कर रहे थे और मैदान पर सेट हो चुके थे। कमिंस की एक अतिरिक्त उछाल वाली गेंद पर विराट ने कवर्स की ओर मारने की कोशिश की, लेकिन बल्ले का किनारा लेकर गेंद स्टंप्स पर जा लगी। कमिंस से पूछा गया कि विराट के आउट होने पर जो माहौल था वह क्या सबसे शानदार मोमेंट था? तो इस पर कमिंस ने कहा, 'हां, मुझे ऐसा लगता है।' कमिंस ने कहा कि उस वक्त जो शांति छाई थी, उसे बर्दाश्त करने में हमें कुछ क्षण लग गए थे। जब विराट बल्लेबाजी कर रहे थे तो ऐसा लग रहा था कि यह उन दिनों में से एक है जब विराट शतक लगाएंगे जैसे की वह हमेशा से करते रहे हैं।

कमिंस ने कहा- मुझे इस विश्व कप में फिर से वनडे से प्यार हो गया। मुझे लगता है कि ऐसे टूर्नामेंट में हर खेल मायने रखता है। द्विपक्षीय सीरीज में परिस्थितियां अलग होती हैं। मेरा मतलब है विश्व कप का इतना शानदार इतिहास है, मुझे यकीन है कि यह लंबे समय तक बना रहेगा। मार्च में भारत दौरे के दौरान कमिंस ने अपनी मां को खो दिया, जिसके कारण उन्हें दौरे को छोटा करना पड़ा था। वह वापस लौटे और फिर देश को विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप का खिताब दिलाया, प्रतिष्ठित एशेज हासिल की और अब वह हासिल किया जिसे क्रिकेट का सर्वश्रेष्ठ टूर्नामेंट कहा जाता है।

कमिंस ने कहा- जिस तरह से यह साल गुजरा है, मुझे उस पर गर्व है। कमिंस ने साथी खिलाड़ियों के त्याग पर भी बातचीत की। उन्होंने कहा-मुझे पता है कि घर पर मेरा परिवार देख रहा है। बस पिता से एक संदेश मिला कि वह सुबह चार बजे उठ जाते हैं। इसलिए वह बहुत उत्साहित हैं। आप खेलने के लिए बहुत त्याग करते हैं। टीम में हर किसी ने इस साल टीम के साथ काफी समय बिताया है, लेकिन हम इसी क्षण के लिए काम करते हैं। हर किसी की अपनी-अपनी कहानी है, लेकिन हमारी टीम में बहुत सारे गौरवान्वित लोग हैं।

अपने होटल के कमरे से उन्होंने नीले कपड़े पहने भारतीय समर्थकों को स्टेडियम की ओर जाते देखा। यह नजारा देखकर ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी जरूर थोड़ा घबरा गए थे। कमिंस ने कहा- मैं हमेशा यह कहना चाहता हूं कि मैं काफी तनावमुक्त हूं, लेकिन फाइनल की सुबह मैं थोड़ा घबराया हुआ था। बस इधर-उधर घूम रहा था, मैच के शुरू होने का इंतजार कर रहा था। होटल के बाहर नीली जर्सी में फैंस का जनसैलाब था।बाहर सेल्फी कैमरे के साथ खड़ी कारों को देखकर, आपको पता चल गया कि आप किसी बहुत खास मैच में जा रहे हैं।
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कमिंस ने कहा- और फिर टॉस के लिए बाहर निकलना और एक लाख 30 हजार नीली भारतीय जर्सी को देखना, यह एक ऐसा अनुभव है जिसे आप कभी नहीं भूलेंगे। बहुत बढ़िया दिन और अच्छी बात यह थी कि उनमें अधिकांश समय शोर नहीं था। कमिंस ने ट्रेविस हेड की तारीफ करते हुए कहा- ट्रेविस हेड ने शानदार पारी खेली। चयनकर्ता एंड्रयू मैकडोनाल्ड और जॉर्ज बेली को भी बहुत सारा श्रेय जाना चाहिए। उन्हें दृढ़ विश्वास था कि हेड को क्यों टीम में शामिल किया जाना चाहिए। जब चोटिल और अनफिट हेड को स्क्वॉड में शामिल किया गया था तो ऐसी संभावना थी कि निर्णय उल्टा पड़ सकता था, लेकिन अब सब सही है। कमिंस ने कहा- उनकी अंगुली टूट गई थी, हाथ टूट गया था, लेकिन उन्हें टीम में बनाए रखना बहुत बड़ा जोखिम था। 
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