ऐसे में सवाल ये उठता है कि आखिर चूक हुई तो कहां हुई? किस्मत ने तो शुरू से ही कोहली का साथ दिया क्योंकि सीरीज से पहले ही इंग्लैंड के सबसे शानदार गेंदबाज जोफरा आर्चर अनफिट होने के चलते बाहर हो गए, उसके बाद टू इन वन वाले हरफनमौला खिलाड़ी बेन स्टोक्स भी सीरीज से हट गए। मार्क वुड और स्टुअर्ट ब्रॉड जैसे तेज गेंदबाज कुछ मैच तो खेले लेकिन नियमित तौर पर गायब हैं। यानि कि देखा जाए तो इंग्लैंड की बी टीम दरअसल इस सीरीज में खेल रही है, जो भारत की टॉप टीम के बराबर दिख रही है।
अगर चूक फिर से कहीं होती दिख रही है तो वो है कोहली की जिद। कोहली ने सीरीज के पहले ही तय कर लिया कि वो हर मैच में चार तेज गेंदबाजों के साथ ही उतरेंगे भले ही इसके लिए उन्हें दुनिया के नंबर 1 स्पिनर रविचंद्रण अश्विन को बाहर ही बिठाना ना क्यों पड़े। कोहली ने तय कर लिया कि चाहे कुछ हो जाए ऋषभ पंत तो छठे नंबर पर ही बल्लेबाजी करेंगे भले ही उनसे तीन मैचों के बाद 100 रन भी नहीं बने हों। दरअसल, प्लेइंग इलेवन पिच की हालात के मुताबिक नहीं चुनना कोहली की कप्तान के तौर पर सबसे बड़ी कमजोरी रही है और दुर्भाग्य से इस सीरीज में कुछ बदलता दिख नहीं रहा है।
लेकिन, अब कोहली के पास बहुत वक्त नहीं बचा है। न्यूजीलैंड के खिलाफ वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप हारने के बाद अगर इंग्लैंड के खिलाफ भी सीरीज जीतने में नाकाम होते हैं तो भले ही उन्होंने क्लाइव लॉयड से ज्यादा टेस्ट जीत लिए हों, उन्हें भारतीय इतिहास का महान कप्तान गिनने में आलोचकों को हिचकिचाहट होगी। कोहली के पास ये ऐतिहासिक मौका है कि वो इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया दोनों मुल्कों में टेस्ट सीरीज जीतने वाले पहले भारतीय ही नहीं एशियाई कप्तान बने लेकिन फिलहाल उनके अपने बल्ले से ही रन प्रचुर मात्रा में नहीं निकल रहें हैं, जिससे उनकी टीम को परेशानी हो रही है।
कहने को लंदन के ओवल की साख स्पिन गेंदबाजों को मदद करने की रही है लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू ये है कि इस मैदान पर पहली और आखिरी बार भारत ने 1971 में टेस्ट मैच जीता था। फॉर्म के लिहाज से जितने रन चेतेश्वर पुजारा, अजिंक्य रहाणे, कोहली और पंत ने मिलकर बनाएं है, उससे ज्यादा रन अकेले इंग्लैंड के कप्तान जो रूट ने बना डालें हैं। यही, दोनों टीमों के फासले को सिर्फ एक वाक्य में दर्शा देता है। अगर कोहली और उनकी टीम को पलटवार करना है तो ना सिर्फ सबसे पहले रूट को जड़ से उखाड़ना होगा बल्कि अपनी बैटिंग चौकड़ी से भी रनों की बारिश की उम्मीद करनी होगी नहीं तो इंग्लैंड में सीरीज जीतने का सपना यूं ही एक बार से धुल जाएगा..
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