वह अचानक मिले और पच्च से दीवार पर थूकते हुए उन्होंने सीधा प्रश्न दागा, क्या आप देशभक्त हैं?
मैं उनके इस अप्रत्याशित हमले से हड़बड़ा गया। संभलते हुए मैंने कहा, वह नागरिक ही क्या, जो देशभक्त न हो! मैं इस देश से प्रेम करता हूं, सभी समुदायों को अपना भाई मानता हूं, और ऐसा कोई काम नहीं कर सकता, जिससे देश का सम्मान घटे। वह हंसने लगे, फिर तो आपको देशभक्ति के लेटेस्ट वर्जन की जानकारी नहीं। सच्चे देशभक्त अपने काम से निरंतर एहसास कराते रहते हैं कि वे किस कदर देशभक्त हैं।
यह किस टाइप की देशभक्ति हुई?
जिस टाइप की भी आप समझना चाहें, पर देशभक्ति की विशेषता यही है कि इसे प्रदर्शित होना पड़ता है। जब तक यह आपके मुंह और हाथ-पांव से प्रदर्शित न हो, तब तक संदिग्ध है। आप घोर देशद्रोही डिक्लेयर किए जा सकते हैं।
लेकिन इस तरह कैसे तय होगा कि बंदा सच्चा देशभक्त है? इसके कोई अवयव भी तो होने चाहिए?
अवयव हैं न, डंडे, झंडे, नारे, सर्टिफिकेट आदि। इन्हीं से ऑन द स्पॉट देशभक्ति सत्यापित की जा सकती है। जैसे गांधी जी की तस्वीर के पीछे रिश्वत छिपाई जा सकती है, वैसे ही जोर-जोर से देशभक्ति के नारे लगाने से आपके सारे पाप छिप सकते हैं। और जब लोग सिहर उठें, तब समझ लो कि देशभक्ति चौबीस कैरेट खरा है।
लेकिन किसी को गाली कैसे दी जा सकती है, संस्कार भी तो आखिर कोई चीज है?
हमें तो कभी लगा नहीं कि गाली देने का मन हुआ हो और संस्कार बीच में आ गया। आजकल संस्कारों की यही खासियत है कि वे गालियों के बीच कभी आड़े नहीं आते।
पर ऐसी देशभक्ति से तो सामने वाला लहूलुहान हो सकता है?
लहूलुहान देशभक्ति ही अच्छी होती है। देशभक्ति जब तक हिरनी-सी दुबकी, मिमियाती हो, तब तक क्या खाक देशभक्ति हुई! देशभक्ति की नई परिभाषा समझाकर वह इत्मीनान से पान चबाते हुए चले गए।