एक बच्ची टेनिस खेलती थी तो लोग उसे खेलते बड़े गौर से देखते थे। उसे इस बात की परवाह नहीं रहती कि कौन उसे देख रहा है। वह जब अभ्यास करती तो टेनिस खिलाड़ी की पूरी वेशभूषा में होती। केरोल हिंगिस और में लालिया ने रेजनोव में जन्मी अपनी इस बच्ची को मार्टिना नाम दिया था। हालांकि उस दौर में स्टेफी ग्राफ कैप्रियाती, सांचेज जैसी लड़किया टेनिस जगत में छाई हुई थीं, लेकिन उन्हें नवरातिलोवा के कैरियर की असाधारण उपलब्धियां और खेलने की शैली प्रभावित करती थी।
इसलिए इस बच्ची को मार्टिना नाम मिला। एक मार्टिना को अगले वर्षों में टेनिस कोर्ट से विदा होना था, वहीं एक नई मार्टिना टेनिस में आने के लिए तैयारी कर रही थी। आखिर उसेमंजिल मिली। आज मार्टिना हिंगिस शिखर पर है। टेनिस की हर उपलब्धि उसके नाम से जुड़ी है। 16 साल बाद फिर वह युगल रैंकिग के शीर्ष अंक पर आते हुए नंबर वन खिलाड़ी बनी है।
आस्ट्रेलियाई ओपन का वूमन डबल खिताब उसने सानिया मिर्जा के साथ मिलकर जीता है। सानिया का बचपन भी टैनिस के साथ ही शुरू हुआ। छह साल की उम्र में वह टेनिस के उस खेल को खेलने लगी जिसके बारे में भारत में कोई ज्यादा जानता भी नहीं था। लेकिन हेदराबाद के जिमखाना क्लब मे रात दिन अभ्यास करने वाली सानिया ने बहुत ऊंची बुलंदियों को छुआ।
भारत को विब्लडन का खिताब तक दिलाया। और भारत इस बात पर गौरवमहसूस कर रहा है कि जिस युगल जोड़ी ने आस्ट्रलियाई ओपन का वूमन डबल खिताबजीता है, उसमें एक नाम सानिया मिर्जा का भी है। सानिया, हिंगिस से छह साल छोटी हैं। दोनो खिलाड़ियों की पारिवारिक पृष्ठभूमि में कुछ फर्क था। मार्टिना के देश में लड़कियों में टेनिस के लिए अच्छी होड़ थी।
मार्टिना को दूसरी मार्टिना नवरातिलोवा बनना था ,इसलिए उनसे खेल की वही शैली अपनाई। वैसा ही कड़ा अभ्यास किया। निरंतर अभ्यास से उसके खेल संवरता गया। मार्टिना के पिता कैरोल हिंगिस और मांमिलानी भी टेनिस के खिलाड़ी थे। उन्होंने दो साल की उम्र में ही अपनी बेटी के हाथ में रैकेट थमाना शुरू कर दिया था। और सीखने का जज्बा ऐसा था कि जब तक मार्टिना आठ साल की हुई तो वह न केवल पहला टूर्नामेंट खेलने उतरी बल्कि उसे जीत भी लिया।
बारह साल की हुई तो पहला ग्रैंड स्लैम जूनियर जीतकर संकेत दे दिया कि टेनिस का नया सितारा आ गया है। आगे की उपलब्धियां टेनिस की दुनिया में जानी पहचानी है। पांच ग्रैंड स्लैम सिंगल टाइटिल्स 12 ग्रैंड स्लैम वूमन डबल्स उनकी उपलब्धियों का लेखाजोखा है। मगर उसके कैरियर के स्वर्णिम दिन आने से पहले मां पिता का अलगाव हो चुका था। मां ने एक स्विस नागरिक से शादी की।
इसके बाद ही मार्टिना के पास भी स्विस नागरिकता थी। मार्टिना के समय महिला टेनिस में कई जगमगाते हुए नाम थे। टेनिस की दुनिया में अपार लोकप्रियता और ख्याति के साथ स्टेफी ग्राफ, मोनिकासेलेस, सांचेज के प्रियाती जैसे नाम खेल और ग्लैमर के साथ थे।
केवल टेनिस कोर्ट में ही नहीं, बल्कि विजनेस वल्र्ड में जिस ग्लैमर का सहारालिया जा रहा था उसमें तमाम सुपर अभिनेत्रियों और माडलिंग वालों से येटेनिस बालाएं पीछे नहीं थी। खेल ही नहीं, ग्लेमर्स पत्रिकाओं में इनके आकर्षक तस्वीरें छपा करती थी।
तब मार्टिना चुपचाप उस मार्टिना पर अपने को फोकस किए रहती थीं जो उसके लिए आर्दश थी। मार्टिना नवरातिलोवा के खेल को पूरी तरह समझा। उसी शैली पर चलकर उन्होंने अपने ध्वज फहराए। आस्टेलियाई ओपन में वह पूरे आत्मविश्वास के साथ उतरी थीं। अब वह कई वर्ष बाद शीर्ष पर थी।
जो रैंक उसकी जोड़ीदार सानिया पहले ही प्राप्त की हुई थीं। टैनिस ने मार्टिना को धन शोहरत यश सब कुछ दिया। ब्लैंडर प्राइड फेशन टूर 2012 उसके साथ जुड़ा है। तमाम खिताबों के साथ वह उस मुकाम पर है जिस हसरतसे अस्सी के दशक में उसे टेनिस का रैकेट पकड़ाया गया था। अब टेनिस की नई लड़कियां इस मार्टिना से सीखना चाहती हैं। और नई मार्टिना बनने के लिए सानिया मिर्जा बेमिसाल है।
इस मायने में मार्टिना से कुछ अलग कि बचपनमें उन्होंने ऐसे देश में टेनिस खेलना शुरू किया, जहां क्रिकेट हाकीफुटबाल की बयार थी। पिता इमरान मिर्जा खेल संवाददाता होने के कारण खेलका माहौल जरूर था लेकिन हेदराबाद जिमखाना में छह साल की उम्र से जबसानिया ने टेनिस खेलना शुरू किया तो कोई नहीं जानता था कि एक दिन वह अपनेखेल से सनसनी फैलाएगी।
महेश भूपति से भी उन्होंने टेनिस सीखा। 1999 में विश्व जूनियर टेनिस चैंपियनशिप में भाग लिया। वाइल्ड कार्ड इंट्री के बाद बिब्लडन में डबल्स जीत हासिल करना, दोहा के एशियाई खेल में मिश्रित युगलमें लिएंडर पेस के साथ स्वर्ण हासिल करना, आस्ट्रेलियन ओपन खिताब जीतना उसकी बड़ी उपलब्धियां हैं। टेनिस की दुनिया विलियम सेरेना और शारापोवा के साथ सानिया के मैचों को याद करती हैं।
टेनिस ने सानिया को कई उपलब्धियां दिलाई। टेनिस के बाहर भी वह एक ग्लैमर गर्ल के रूप में पहचानी गई। नाक में पहनी नथ को लड़कियों ने फैशन का सेंबल बनाया। वह भी फैशन पत्रिकाओं के पहले पेज पर दिखी। विवादों से भी उसका नाता रहा। उसके खेलने पर भी कुछ धार्मिक संगठनों को एतराज रहा। टेनिस में पहने जाने वाली पोशाक पर भी कमेंट्स हुए।
उसने पाकिस्तानी क्रिकेटर से शादी की तो नागरिकता पर बवाल होने लगा, आखिर उसकी उपलब्धियों का श्रेय भारत ले या पाकिस्तान। विवाद को सानिया ने ही निपटाया कि वह भारतीय नागरिक है। उसकी उपलब्धियां भारत से जुड़ी हैं। ग्रैंड स्लैम उसे हासिल हुए हैं।
यह उसका गौरव रहा कि देश में बसे कम उम्र में उन्हें पद्मश्री पुरस्कार मिला। उन्हें देश का खेल का सबसे बड़ा अवार्ड अर्जुन पुरस्कार मिला। सानिया और हिंगिस का आपस में जु़ड़ना भारत के खेलों के लिए स्वर्णिम अवसर लाया है। जिस आस्ट्रेलियाई ओपन से हमारा दूर-दूर का नाता नहीं होता, वहां एक भारतीय लड़की चमचमातीट्राफी हाथों में लेते हुए दिखी। सानिया सोना लाने वाली लड़की है।