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संकट: ऐसे तो दम घुटता ही रहेगा, प्रदूषण से मुक्ति के लिए राज्य सरकारों को मिलकर करने होंगे उपाय

ज्ञानेंद्र रावत
Updated Fri, 03 Nov 2023 07:32 AM IST

सार

दिल्ली तभी प्रदूषण मुक्त हो सकती है, जब सभी राज्य सरकारें वायु प्रदूषण के नुकसान को समझें और उसके निराकरण के ठोस उपाय करें।
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दिल्ली में प्रदूषण (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला


डॉक्टरों की मानें, तो खांसी, जुकाम, गले में खराश, अस्थमा, सांस लेने में परेशानी, गठिया, जोड़ों के दर्द के रोगियों की अस्पतालों में बाढ़ आ गई है। सांस के जरिये प्रदूषक तत्व शरीर में पहुंचकर सांस की नली, फेफडे़ को प्रभावित करते हैं, जो बाद में हार्ट अटैक और कैंसर जैसी बीमारी के कारण बनते हैं। एम्स के रूमेटोलाजी विभाग के अध्यक्ष डॉ उमा कुमार कहते हैं कि शोध में पाया गया है कि वातावरण में पीएम 2.5 का स्तर बढ़ने से शरीर में सूजन वाले मार्कर बढ़ जाते हैं, िजसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली ही स्वस्थ कोशिकाओं पर हमला करती है। गठिया और ऑटोइम्यून की बीमारी बढ़ जाती है। इसलिए गठिया के मरीजों को घर के बाहर निकलने पर मास्क का इस्तेमाल करना चाहिए।


अपोलो के इंटरनल मेडिसिन के विशेषज्ञ डॉ. सुरनजीत चटर्जी के मुताबिक, प्रदूषण के साथ सुबह में ठंड का प्रकोप बढ़ने से दिल की बीमारियां भी बढ़ जाती हैं। मौसम में बदलाव से खांसी, जुकाम, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस के मरीज भी बढ़ रहे हैं। सामान्य मास्क से वातावरण में मौजूद सूक्ष्म कण नहीं रुक पाते। इसलिए एन-95 मास्क का इस्तेमाल बेहतर होता है। ज्यादा प्रदूषित जगह पर प्यूरीफायर लगाना उचित रहता है।


मौसम विभाग और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की मानें, तो हाल-फिलहाल प्रदूषण में राहत मिलने के आसार न के बराबर हैं। बोर्ड के अनुसार, ग्रेटर नोएडा, फरीदाबाद, गाजियाबाद, गुरुग्राम व नोएडा में प्रदूषण का स्तर बहुत ज्यादा है। इस दौरान वातावरण में पीएम-10 का स्तर 288 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर रहा, जो सामान्य से तीन गुना अधिक है।


दिल्ली सरकार प्रदूषण रोकने की दिशा में ग्रीन एप के माध्यम से कूड़ा जलाने, प्रदूषण फैलाने वालों पर कड़ी निगरानी रखने, पुराने वाहनों की धर-पकड़ करने, ग्रैप के विभिन्न चरणों को लागू करने, हरित क्षेत्र बढ़ाने के लिए लाखों पेड़ लगाने, 1,700 से ज्यादा कंपनियों में सीएनजी और पीएनजी का इस्तेमाल करने, दिल्ली के दो कोयला आधारित संयंत्र बंद करने और पड़ोसी राज्यों में पराली जलाए जाने पर रोक लगाने के लिए केंद्र के साथ लगातार बैठकें करने और आवश्यक उपाय करने के दावे कर रही है, लेकिन प्रदूषण पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है, जबकि दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय खुद सड़कों पर प्रदूषण रोकने के प्रयासों का जायजा लेते अक्सर दिखाई देते हैं। अगर डब्ल्यूएचओ की मानें, तो दिल्ली वायु गुणवत्ता की सुरक्षित सीमा से 20 गुना अधिक प्रदूषित है।


विशेषज्ञों के मुताबिक, दिल्ली के बढ़ते प्रदूषण में पराली की अहम भूमिका है। दिल्ली के उपराज्यपाल हरियाणा व पंजाब के मुख्यमंत्रियों से पिछले दिनों पराली का प्रदूषण रोकने का अनुरोध भी कर चुके हैं। एनसीआर के सभी राज्यों में पराली जलाने की घटनाओं में कमी आ जाए, तो दिल्ली में इसका सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा। यह तभी संभव है, जब इन संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्री किसानों के साथ बातचीत कर उनसे पराली जलाने पर रोकने लगाने का प्रयास करें। इसके अलावा, दिल्ली से बाहर एनसीआर क्षेत्र में तकरीबन दो हजार ईंट के भट्ठे पुरानी तकनीक से और तीन हजार उद्योग कच्चे ईंधन से चल रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी ने भी बार-बार कहा है कि भट्ठा संचालकों के साथ बात करके उन्हें नई तकनीक के तहत संचालन के लिए प्रोत्साहित किया जाए, लेकिन आज तक किसी मुख्यमंत्री ने ऐसी पहल नहीं की है। दिल्ली तभी प्रदूषण मुक्त हो सकती है, जब संबंधित सरकारें वायु प्रदूषण के नुकसान को समझें और उसके निराकरण के लिए मिलकर ठोस उपाय करें।  

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