यह मानव विडम्बना है, एक ओर ये लोग अपनी जान की कीमत पर लोगों की जान बचाने में लगे हुए हैं, दूसरी ओर नाजी लोगों को गाड़ियों में भर-भर कर मृत्यु शिविर पहुंचा रहे हैं। अंत में नाजी घेटो में आग लगा कर बचे-खुचे यहूदियों को समाप्त कर डालते हैं।
टोनिया बाल ब्लीच करके, कुछ लोगों को आर्य बना कर, बचा कर बाहर भेज रही थी। एक बार ऐसी दो स्त्रियां पकड़ी जाती हैं। उनके जाली पासपोर्ट का भेद खुल जाता है। दोनों को वहीं सड़क पर फांसी दे दी जाती है। अत: इस तरकीब को तिलांजलि देनी पड़ती है। जैन जाबिन्स्की वार्सा प्रतिरोध में संलग्न था, वहां उसकी गर्दन में गोली लगती है और वह गिरफ्तार कर लिया जाता है। इसके पहले पैदा हुई अपनी बच्ची को ये लोग टेरेसा नाम देते हैं।
पति का पता लगाने के लिए एंटोनिया हेक के पास जाती है, वह उसका बलात्कार करना चाहता है। किसी तरह वह उसके चंगुल से बच निकलती है। रूसी फौजें आने लगी हैं, नाजी वार्सा खाली कर रहे हैं। डॉ. हेक दीवाल पर ड्राइंग्स देखता है, उसे यहूदियों के वहां छिपे होने का पता चल जाता है। एंटोनिया समय रहते यहूदियों को वहां से निकाल चुकी है।
हेक को जब कुछ नहीं मिलता है तो वह एंटोनिया के बेटे पर आक्रमण करता है, उसे बंदूक की नोंक पर रखता है। एंटोनिया के याचना करने पर वह बेटे को छोड़ देता है, वहां से चला जाता है। एंटोनिया हेक के परीक्षण के लिए कैद साढ़ को मुक्त कर देती है, वह जंगल में भाग जाता है।
वार्सा का पुनर्निर्माण
अब नाजियों ने समर्पण कर दिया है, वार्सा का पुनर्निर्माण प्रारंभ होता है। एंटोनिया बचे-खुचे लोगों के साथ फिर से चिड़ियाघर बनाने में जुट जाती है। आज भी वार्सा का यह जू पर्यटकों का मनोरंजन करता है।
युद्ध के बाद वार्सा की केवल 6% आबादी जीवित बची थी। युद्ध की समाप्ति के पूर्व हेक बर्लिन लौटता है, तब तक मित्र सेना ने बम वर्षा द्वारा उसका चिड़ियाघर नष्ट कर दिया था। सोचने की बात है, आदमियों के युद्ध में निरपराध पशुओं का वध हुआ, उन्होंने किसी का क्या बिगाड़ा था?
वे न तो यहूदी थे, न ही नाजी। मगर नाजियों ने भी उन्हें नष्ट किया और मित्र सेना ने भी उनकी हत्या की। हेक के बेहूदा प्रयोग बुरी तरह असफल रहे थे। हां, प्रयोगों के नाम पर उसने पशुओं के साथ मनमाना क्रूर व्यवहार अवश्य किया।
जैन जाबिन्स्की की वापसी पर परिवार-पुनर्मिलन का दृश्य बड़ा मार्मिक और खूबसूरत है। जान जोखिम डाल कर दूसरों की जिंदगी बचाने वाले जैन से किसी ने पूछा, ‘उसने ऐसा क्यों किया? उसका उत्तर था, ‘मैंने केवल अपनी ड्यूटी की – अगर आप किसी की जिंदगी बचा सकते हैं, तो इसकी कोशिश करना आपका कर्तव्य है।’
‘सेफ हेवन: द वार्सा जू’
2009 में ‘सेफ हेवन: द वार्सा जू’ नाम से एक डॉक्यूमेंट्री बनी है। 2017 में न्यूजीलैंड की फिल्म निर्देशक निकी कारो ने इस वास्तविक जीवन पर आधारित ‘द जू कीपर्स वाइफ’ नाम से ही फिल्म बनाई है। सशक्त स्त्री एंटोनिया के किरदार को परदे पर खूबसूरत और कोमल अभिनेत्री जेसिका चैस्टैन ने कुशलता के साथ अभिनीत किया है।
किताब और फिल्म दोनों इतिहास के सर्वाधिक जघन्य, अमानवीय काल में स्त्री के उल्लेखनीय सकारात्मक योगदान को प्रदर्शित करती है।
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