मिस्र और भारत का हजारों साल का रिश्ता
अल गूना फिल्म फेस्टिवल के निर्देशक इंतिशाल अल तिमिमी कहते हैं कि उन्हें भारत से बेइंतहा मोहब्बत है। मिस्र और भारत के बीच करीब पांच हजार सालों से अनोखा रिश्ता रहा है। वह केरल अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह की जूरी में भी रह चुके हैं। अदूर गोपालकृष्णन, शाजी एन करूण, मणि कौल से उनकी गहरी दोस्ती रही है। उनका मानना है कि पिछले पंद्रह साल से हिंदी में न्यू वेव सिनेमा का जो आंदोलन चल रहा है, वह भारतीय सिनेमा को काफी हद तक बदल रहा है।
आईएसआईएस की पोल खोलती 'सबाया'
पांचवें अल गूना फिल्म फेस्टिवल में कुर्दिश मूल के स्वीडिश फिल्मकार होगीर हीरोरी की डाक्यूमेंट्री 'सबाया' की बड़ी चर्चा रही। होगीर हीरोरी अपनी जान जोखिम में डालकर उत्तरी सीरिया के यजिदी होम सेंटर में रात के अंधेरे में चालीस बार गए और यह फिल्म शूट की। उन्होंने उन कई औरतों के इंटरव्यू लिए, जिन्हें इस्लामिक स्टेट आईएसआईएस के लोगों ने अपहरण कर जबरन सेक्स स्लेव बनाया था।
महमूद, जियाद और उनके समूह ने सिर्फ एक स्मार्ट फोन और पिस्तौल के बल पर रात के अंधेरे में सीरिया के सबसे खतरनाक कैंप अल होल से 258 यजीदी औरतों को निकाला था, जिन्हें वहां सेक्स स्लेव बनाकर रखा गया था। उनमें से 52 औरतें बलात्कार से गर्भवती हुईं और बच्चों को जन्म दिया। इसमें एक नौ साल की बच्ची मित्रा भी थी।
फेस्टिवल्स की फेवरिट फिल्म
'सबाया' फिल्म के निर्देशक होगीर हीरोरी का जन्म कुर्दिस्तान में हुआ था, पर 1999 में वह शरणार्थी बनकर स्वीडन आ गए। इस फिल्म को सन डांस फिल्म फेस्टिवल में 'वर्ल्ड डाक्यूमेंट्री प्राइज और हांगकांग अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में जूरी प्राइज से नवाजा गया है। यह फिल्म दुनिया के पचास फिल्म समारोहों में दिखाई जा चुकी है और इसे करीब तीस टेलीविजन चैनल प्रसारित कर चुके हैं।
फिल्म में कैमरा वास्तविक व्यक्तियों, जगहों और घटनाओं को दिखाता है और तथ्यों के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है। उन गुलाम औरतों की आपबीती उन्हीं की जुबानी सुनाई गई है और उनके कैंपों की अमानवीय हालत देखकर डर लगता है।
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