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निवेश मंत्रा: पुरानी कर व्यवस्था में निवेश कर बचाएं पैसे; जानें टैक्स बचाने का गणित

Mon, 01 Apr 2024 07:26 AM IST
जलज मिश्रा अजीत सिंह, नई दिल्ली

सार

टैक्स बचाने के लिए पुरानी कर व्यवस्था अब भी आकर्षक बनी हुई है। आंकड़े बताते हैं कि ज्यादातर लोग अब भी इसे पसंद कर रहे हैं। ऐसे में आप अब भी इस व्यवस्था का चुनाव कर अपनी गाढ़ी पर अच्छा-खासा टैक्स बचा सकते हैं। टैक्स बचाने का गणित बताती अजीत सिंह की रिपोर्ट-

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Tax Saving Investment Scheme - फोटो : Istock
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विस्तार
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अगर आपकी आय टैक्स श्रेणी में आती है, तो कर गणना के लिए पुरानी और नई कर व्यवस्था में एक को चुनना होगा। नई कर व्यवस्था में दरें कम हैं। पुरानी कर व्यवस्था ज्यादा छूट की सुविधा देती है। इससे टैक्स वाली आय कम हो जाती है और देनदारी कम हो जाती है। नई कर व्यवस्था में आय 7 लाख रुपये या उससे कम है तो कोई टैक्स नहीं देना होगा। आप सैलरी वाले हैं तो 50,000 रुपये की स्टैंडर्ड कटौती भी मिलेगी। यदि टैक्स की आय 7.5 लाख से अधिक है, तो पूरी आय पर टैक्स देना होगा। नई व्यवस्था में विभिन्न धाराओं जैसे 80सी, 80डी, 24 आदि के तहत कटौती का दावा नहीं कर सकते हैं। कर योग्य आय 7.5 लाख से अधिक है तो पुरानी टैक्स व्यवस्था अपनाना सही होगा।

टैक्स बचत और निवेश का दोहरा लाभ

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पुरानी टैक्स व्यवस्था निवेश करने के साथ टैक्स बचत में मदद करती है। धारा 80सी के तहत निवेश पर 1.5 लाख रुपये तक की कटौती का दावा कर सकते हैं। यदि जीवनसाथी और बच्चों के लिए स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ली है, तो 60 वर्ष से कम आयु होने पर प्रीमियम के रूप में भुगतान किए गए 25,000 रुपये तक की कटौती का दावा कर सकते हैं। वरिष्ठ नागरिक माता-पिता के स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी के प्रीमियम पर 50,000 रुपये तक का दावा कर सकते हैं। नियोक्ता के माध्यम से एनपीएस में निवेश करने और कर योग्य वेतन को कम करने का मौका दोनों टैक्स व्यवस्थाओं में हैं।

एनपीएस के जरिये अतिरिक्त कर बचत
ज्यादातर समय 80 सी के तहत 1.5 लाख रुपये की सीमा ईपीएफ योगदान, बच्चों की शिक्षा फीस और होम लोन मूलधन पुनर्भुगतान से समाप्त हो जाती है। ऐसे में धारा 80सीसीडी (1बी) के तहत एनपीएस में 1.5 लाख रुपये की सीमा से अधिक निवेश कर 50,000 रुपये अतिरिक्त बचा सकते हैं।

एचआरए में भी फायदा, होम लोन पर भी दावा

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अगर आप किराये पर रहते हैं और अपने वेतन के एक हिस्से के रूप में मकान किराया भत्ता (एचआरए) प्राप्त कर रहे हैं, तो कटौती का दावा कर सकते हैं। कुछ स्थितियों में, घर किसी दूसरे शहर में है और किराये पर दी गई संपत्ति है, तो आप होम लोन के बावजूद एचआरए लाभ प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा, होम लोन लेने वाला व्यक्ति ब्याज भुगतान के कारण धारा 24 (बी) के तहत हर वित्त वर्ष 2 लाख रुपये तक की कटौती का दावा कर सकता है। आप पात्र संस्थानों को किए गए दान के लिए धारा 80जी के तहत कटौती का दावा कर सकते हैं।

पुरानी कर व्यवस्था ज्यादा छूट की सुविधा देती है। इससे कर वाली आय कम हो जाती है और देनदारी कम हो जाती है। नई कर व्यवस्था में आय 7 लाख रुपये या उससे कम है तो कोई टैक्स नहीं देना होगा।  -अर्चना पांडे, निवेश सलाहकार

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