खास बात यह है कि वायु प्रदूषण की समस्या सिर्फ दिल्ली में ही नहीं है बल्कि देश के लगभग सभी शहरों की हो गई है।
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ग्रीनपीस इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में वायु प्रदूषण की स्थिति भयावह है। कुल 168 भारतीय शहरों में से एक भी विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के मानकों के अनुरूप नहीं है। इस संगठन ने आरटीआई समेत कई स्रोतों के हवाले से बताया है कि भारत में हर साल वायु प्रदूषण के चलते 12 लाख लोगों की जान चली जाती है। यह तादाद तंबाकू के सेवन से हर साल काल का ग्रास बनने वालों के अनुपात से बस थोड़ी सी ही कम है। इतना ही नहीं, देश का तीन प्रतिशत सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) जहरीली हवा के धुएं में घुल जाता है। अगर देश का विकास जरूरी है तो सबसे पहले वायु प्रदूषण से लड़ना होगा।
एक अध्ययन के मुताबिक वायु प्रदूषण भारत में मौत का पांचवां बड़ा कारण है। हवा में मौजूद पीएम25 और पीएम10 जैसे छोटे कण मनुष्य के फेफड़े में पहुंच जाते हैं, जिससे सांस व हृदय संबंधित बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है। इससे फेफड़ा का कैंसर भी हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का नया अध्ययन यह बताता है कि हम वायु प्रदूषण की समस्या को दूर करने को लेकर कितने लापरवाह हैं और यह समस्या कितनी विकट होती जा रही है।
खास बात यह है कि ये समस्या सिर्फ दिल्ली में ही नहीं है बल्कि देश के लगभग सभी शहरों की हो गई है। अगर हालात नहीं सुधरे तो वो दिन दूर नहीं जब शहर रहने के लायक नहीं रहेंगे। जो लोग विकास, तरक्की और रोजगार की वजह से गांव से शहरों की तरफ आ गए हैं उन्हें फिर से गांवों की तरफ रुख करना पड़ेगा।
स्वच्छ वायु सभी मनुष्यों, जीवों एवं वनस्पतियों के लिए अत्यंत आवश्यक है। इसके महत्त्व का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि मनुष्य भोजन के बिना हफ्तों तक जल के बिना कुछ दिनों तक ही जीवित रह सकता है, किन्तु वायु के बिना उसका जीवित रहना असम्भव है। मनुष्य दिन भर में जो कुछ लेता है उसका 80 प्रतिशत भाग वायु है। प्रतिदिन मनुष्य 22000 बार सांस लेता है। इस प्रकार प्रत्येक दिन में वह 16 किलोग्राम या 35 गैलन वायु ग्रहण करता है।
वायु विभिन्न गैसों का मिश्रण है जिसमें नाइट्रोजन की मात्रा सर्वाधिक 78 प्रतिशत होती है जबकि 21 प्रतिशत ऑक्सीजन तथा 0.03 प्रतिशत कार्बन डाइ ऑक्साइड पाया जाता है तथा शेष 0.97 प्रतिशत में हाइड्रोजन, हीलियम, आर्गन, निऑन, क्रिप्टन, जेनान, ओजोन तथा जल वाष्प होती है। वायु में विभिन्न गैसों की उपरोक्त मात्रा उसे संतुलित बनाए रखती है। इसमें जरा सा भी अन्तर आने पर वह असंतुलित हो जाती है और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित होती है। श्वसन के लिए ऑक्सीजन जरूरी है। जब कभी वायु में कार्बन डाई ऑक्साइड, नाइट्रोजन के ऑक्साइडों की वृद्धि हो जाती है, तो यह खतरनाक हो जाती है।
सिर्फ दिल्ली ही नहीं बल्कि देश के कई शहरों का वातावरण बेहद प्रदूषित हो गया है। इसे रोकने के लिए सरकार को अब जवाबदेही के साथ एक निश्चित समय सीमा के भीतर ठोस प्रयास करना पड़ेगा नहीं तो प्राकृतिक आपदाओं के लिए हमें तैयार रहना होगा। जिस तरह से आज राजधानी दिल्ली के लोग शुद्ध हवा में सांस लेने को तरस रहें हैं। ऐसे में वो दिन दूर नहीं जब देश के अधिकांश शहरों का यही हाल होगा इसलिए हमें कल से नहीं बल्कि आज से या कहे अभी से इस रोकने के लिए तत्काल कदम उठाना होगा। सरकार के साथ साथ समाज और व्यक्तिगत स्तर पर भी काम करना होगा तभी इन सब से छुटकारा मिल पाएगा।
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