सन् 1963 में मोर को राष्ट्रीय पक्षी का दर्जा दिया गया था। इस सम्मान का कारण मोर की सुंदर आकृति तो थी ही, मगर उससे भी ज्यादा अनर्घ्य था उसका ऐतिहासिक और धार्मिक मूल्य।
- फोटो : Facebook/Prabhat Sharma
भारतीय संस्कृति में मोर का महत्व
हिंदुओं में कृष्ण भगवान भी मोर से संबंधित है। एक कथा के अनुसार, एक बार जब कृष्ण भगवान ने अपनी बांसुरी बजाई, सब मोर नाचने लगे फिर मोरों के राजा ने कृष्ण को धन्यवाद देते हुए यह मांग की कि वो उनका एक पंख सदैव पहन रखें, इसलिए कृष्ण भगवान की सब कृतियों तथा चित्रों में वह अपने सिर पर एक मोर का पंख जरूर पहने होते हैं। इस्लाम में भी मोर के पंखों को जन्नत से संबंधित किया जाता है। कई लोग कुरान में मोर के पंख और गुलाब की पंखुड़ियां रखते हैं।
मोर के बारे में कई कल्पित कथाएं भी प्रसिद्ध हैं। बहुत घरों में लोग आज भी मोर के पंख रखते हैं। मान्यता यह है कि यह पंख घरवालों के जीवन में सौभाग्य और समृद्धि की बौछार करता है। कुछ लोग यह भी मानते हैं कि मोर के पंख रखने से घर में कोई कीड़े मकोड़े नहीं आएंगे।
इतिहास में राजा-महाराजा भी अपने बगीचे में मोर पालते थे। हमारे राष्ट्रीय पक्षी का अद्वितीय रूप, मॉडर्न कांचीपुरम सिल्क साड़ियों से लेकर मेहंदी के डिजाइन में अक्सर देखा जाता है। यह सब मोर की लोकप्रियता का प्रमाण है।
यह श्रंखला 'नेचर कन्जर्वेशन फाउंडेशन (NCF)' द्वारा चालित 'नेचर कम्युनिकेशंस' कार्यक्रम की एक पहल है। इस का उद्देश्य भारतीय भाषाओं में प्रकृति से सम्बंधित लेखन को प्रोत्साहित करना है। यदि आप प्रकृति या पक्षियों के बारे में लिखने में रुचि रखते हैं तो ncf-india से संपर्क करें।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।