प्रकाश के कुछ अन्य रूपों से कीटों से दृष्टि बाधित होती है।
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कृत्रिम प्रकाश का कीटों पर प्रभाव
कृत्रिम प्रकाश का कीटों पर पड़ने वाले प्रभावों का पता लगाने के लिए शोधकर्ताओं ने कीटों और उन्हें अपना शिकार बनाने वाले पक्षियों की दृष्टि पर 20 से अधिक प्रकार की रोशनी के प्रभाव की जांच की है। अध्ययन में पाया गया कि कई कीटों की दृष्टि कुछ विशिष्ट प्रकार की रोशनी में बढ़ जाती है, जबकि प्रकाश के कुछ अन्य रूपों से इनकी दृष्टि बाधित होती है।
एक्सेटर विश्वविद्यालय के कार्नवाल कैंपस में स्थित पारिस्थितिकी एवं संरक्षण केंद्र से जुड़े शोधकर्ता डॉक्टर जालयान ट्रासिआंकों बताते है कि आधुनिक ब्रांड-स्पेक्ट्रम प्रकाश व्यवस्था इंसानों को रात में अधिक आसानी से रंगों को देखने में सक्षम बनाती है। लेकिन ये आधुनिक प्रकाश स्रोत अन्य जीव-जंतुओं की दृष्टि पर बहुत ज्यादा नकारात्मक प्रभाव डालते है।
इसके पीछे की वजह यह है कि मानव दृष्टि के लिए डिजाइन की गई कृत्रिम रोशनी में नीली और पराबैंगनी श्रेणियों का अभाव होता है, जो इन कीटों की रंगों को देखने की दृष्टि क्षमता के निर्धारण में अहम है।
यह स्थिति कई परिस्थितियों में किसी भी रंग को देखने की कीटों की क्षमता को अवरुद्ध कर देती है। ऐसी स्थिति कीटों को शिकारियों से बचकर छिपे रहने के लिए अनुकूल नहीं होती है।
फूलों को खोजना एवं परागण करना भी उनके लिए कठिन हो जाता है। ऐसे में, प्रकाश की मात्रा एवं तीव्रता को सीमित करने के सामान्य प्रयासों से आगे बढ़कर प्रकाश व्यवस्था के लिए संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाए जाने की जरूरत है।
कृत्रिम प्रकाश से स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
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जरूरी है कारगर उपाय
कृत्रिम प्रकाश व्यवस्था की जरूरतों और उपयोगिता को समझते हुए आगे से कदम उठाए जाने चाहिए। कृत्रिम प्रकाश से होने वाला प्रदूषण समस्त वातावरण को प्रदूषित करता है। प्रकाश प्रदूषण स्वाभाविक तौर पर पारिस्थितिकी तंत्र को बाधित करता है। कृत्रिम प्रकाश की तीव्रता बैचेनी को बढ़ा देती है और मानव स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती है।
कृत्रिम प्रकाश व्यवस्था को दुरुस्त करके ना केवल हम कीटों पर पड़ने वाले विनाशी प्रभाव को कम कर सकते हैं, बल्कि हमारे स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों से भी बच सकते हैं। इसके लिए हमें आकाश-प्रदीप्ति को कम करना होगा, प्रकाश अतिचार में कमी करनी होगी, आवश्यक न्यूनतम तीव्रता के साथ प्रकाश के स्रोतों का उपयोग, अधिभोग सेंसर का उपयोग करते हुए प्रकाश प्रदूषण को बहुत हद तक कम किया जा सकता है।
इसके साथ-साथ प्रकाश जुड़नार में सुधार किया जाए, जिससे कि वे अपने प्रकाश को जहां जरूरत है वहां और अधिक सटीकता और न्यून पक्ष प्रभाव को निर्देशित कर सके। इसके अलावा हमारी कृत्रिम प्रकाश प्रदूषण के प्रति जागरूकता ही पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती प्रदान कर सकती है।
अगर हम कृत्रिम प्रकाश व्यवस्था को दुरुस्त कर लेते है, तो बहुत हद तक संभव है कि हम स्वास्थ्य पर पड़ने वाले बुरे प्रभाव से बच सकते हैं और कीटों के जीवन को भी बचा सकते हैं।
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