हिंदी दिवस 2021: हमें प्रण लेना चाहिए कि हर दिन अपनी भाषा के नाम हो,
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भाषा से परिवार जुड़ता है समाज में एकता आती है
भाषा ही वह इकाई है जो व्यक्ति को आपस में जोड़ती है, व्यक्ति आगे परिवार को जोड़ता है वही परिवार समाज को जोड़ता है और इस तरह समाज से गांव, नगर, शहर व देश बनता है। देश का विकास तब होगा जब भाषा का विकास होगा भाषा का विकास तब होगा जब हम व्यक्तिगत रूप से इससे जुड़ेंगे व जोड़ेंगे। हमें यह इंतजार नहीं करना होगा कि आज 14 सितंबर हिंदी राष्ट्रीय दिवस है या 10 जनवरी अंतरराष्ट्रीय हिंदी दिवस है।
हमें तो प्रत्येक दिन को हिंदी दिवस समझना चाहिए क्योंकि जब तक आप मन से किसी चीज से नहीं जुड़ते तब तक आप पर चाहे सैकड़ों दिवस थोप दिए जाएं या सैंकड़ों आदेश जबर्दस्ती लागू करवा दिए जाए उस भाषा का विकास नहीं हो सकता।
आज बेशक चाहे युवा वर्ग हिंदी को लेकर हीन भावना का शिकार है लेकिन यह उसकी कमी नहीं यह कमी है हमारे संस्कारों की जो हमनें हिंदी की बजाए अन्य भाषा में जबर्दस्ती उस पर थोपे जिस कारण आज वह खुद को हिंदी में बोलने लिखने से भी शर्म महसूस करने लग गया।
वह भाषा जिसे विदेशों से लोग सीखने के लिए देश में आते हैं परंतु हम खुद उससे मुख मोड़ रहे हैं जो बेहद आत्मचिंतन का विषय है। हिंदी प्रत्येक भारतीय नागरिक के विकास की नींव हैं। नींव को छोड़कर हम कुछ देर तक जरूर हवाई महल खड़ा कर सकते हैं परन्तु दीर्घकाल तक नहीं।
शहरों और गांवों का मतभेद संसाधनों के रूप में ही नहीं भाषा के रूप में भी है और इस मतभेद को अपनी भाषा से ही दूर किया जा सकता है। हिंदी ही वह भाषा है जो हमारी अमूल्य संस्कृति को सहेज कर रखे हुए है। हम आप देश के किसी भी कोने से संबंधित हों लेकिन हमें एक भारतीयता की पहचान करवाती है हिंदी।
विश्व में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है हमारी हिन्दी भाषा के उत्थान के लिए हमें न तो किसी दिवस का मोहताज होना चाहिए न ही हमें किसी पुरस्कार या सम्मान की आस रखनी चाहिए कि हमें यह मिलेगा हम तब इसको बढ़ावा देंगे, यदि हम अपनी राज भाषा को बढ़ावा देंगे तो यह बढ़ावा भाषा ही नहीं बल्कि देश के विकास को बढ़ावा देने वाली बात होगी।
देश के विकास से बडा़ कोई और पुरस्कार नहीं हो सकता। हमें प्रण लेना चाहिए कि हर दिन अपनी भाषा के नाम हो, हो सके तो हर जरूरी काम अपनी भाषा में हो। हमारे संस्कार ऐसे हों कि आने वाली पीढ़ी में कम से कम अपनी भाषा का मौलिक ज्ञान तो जरूर हो। यह हम सबकी अपनी भाषा है और इससे हमें आत्मीयता से जुड़ने व सहेजने की जरूरत है।
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