महेंद्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय ने जीनोम एडिटिंग के जरिये टमाटर की ऐसी किस्म ईजाद की है जो स्वादिष्ट और विटामिन डी से भरपूर तो है ही, ब्लड प्रेशर नियंत्रण में भी मददगार है। विशेष यह भी कि इसे डीप फ्रीजर के बिना ही एक महीने तक स्टोर कर सकते हैं।
यूनिवर्सिटी में यह शोध 2018 से शुरू हुआ था। इसकी अगुवाई जैव प्रौद्योगिकी विभाग के प्रभारी डॉ. रूपेश देशमुख कर रहे हैं। डॉ. रूपेश के मुताबिक, टमाटर की नई किस्म तैयार करने से जुड़े शोध का पहला चरण वर्ष 2022 में पूरा हुआ था।
इस दौरान शोधार्थी संस्कृति वत्स ने जीनोम एडिटिंग करके टमाटर के तीन जीन बदले। उनकी पीएचडी पूरी हो जाने के बाद दूसरे चरण में शोधार्थी बादल महाकालकर ने इसे आगे बढ़ाया। उन्होंने दो अन्य जीन में बदलाव किया है।
इसमें पहला जीन एसआई-7 है जो बदलाव के बाद टमाटर में विटामिन डी की मात्रा बढ़ाएगा। दूसरा बदलाव जीन जीएडी-3 में किया है। इससे हरे टमाटर तक सीमित गाबा (यानी गामा-अमीनो ब्यूटरिक एसिड) अब पकने के बाद भी खत्म नहीं होगा।
डॉ. रूपेश बताते हैं कि पूरा शोध विवि की लैब में ही हुआ है। जीनोम तकनीक से टमाटर में विटामिन डी, गाबा और लाइकोपेन की मात्रा बढ़ाई गई है। इसे खाने से शरीर में विटामिन डी की कमी तो दूर होगी ही, गाबा के कारण चैन की नींद के साथ रक्तचाप (बीपी) नियंत्रण में भी मदद मिलेगी।
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जीन में किए गए बदलाव
शोध के दौरान अर्का विकास, काशी विशेष, पूसा रूबी व पूसा अर्ली ड्वार्फ, उच्च उपज देने वाली, ओपन-पॉलिनेटेड (गैर-संकर) टमाटर की किस्मों पर शोध किया गया। पहले चरण में एसआईएसपी 5जी, लाइकोपेन बी-साइक्लेस और पेक्टेट इयास जीनों को संशोधित किया गया। दूसरे चरण में एसआई-7 और जीएडी-3 को मॉडिफाई किया है।
छिलका मोटा...रंग भी अधिक लाल
बादल बताते हैं कि नई किस्म को बगैर किसी एडवांस तकनीक (डीप फ्रीजर) के चार हफ्ते तक स्टोर कर सकते हैं। टमाटर की सामान्य किस्में ऐसे अधिकतम दो हफ्ते तक ही बच पाती हैं। सामान्य के मुकाबले नई किस्म के टमाटर का छिलका मोटा और रंग भी अधिक लाल रहेगा।
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ऊसर जमीन पर भी फसल संभव
टमाटर की नई किस्म से ऊसर वाली जमीन पर भी खेती संभव है। बादल के मुताबिक, यह पौधा मध्यम आकार का है। इसे अधिक बढ़त की जरूरत नहीं होती। इतने में ही भरपूर पैदावार देता है। इस कारण ऊसर (लवणीय) जमीन पर भी फसल लेना संभव हो सकता है। हालांकि, अभी इस पर और शोध की जरूरत है।
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आईबीएससी से मंजूरी के बाद बाजार में आएगा बीज
डॉ. रूपेश के मुताबिक, नई किस्म को बाजार में उतारने की मंजूरी इंस्टीट्यूशनल बायो सेफ्टी कमेटी (आईबीएससी) से मांगी है। जीन में बदलाव वाली किस्मों की कमेटी से अनुमति लेना जरूरी है। यह मिलते ही उपलब्ध स्टॉक को बाजार में दे देंगे। नई किस्म का नाम भी तय करेंगे। फिर, किसान इसका ट्रॉयल कर सकते हैं। शोध के तहत पहला ट्रायल प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में ही होगा। इसकी पैदावार भी मौजूदा किस्मों के मुकाबले बेहतर होगी।
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अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में मिला अवार्ड
हिसार स्थित गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी (जीजेयू) में 16 मार्च को हुए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में बादल ने अपने शोध की प्रस्तुति दी। इस पर आयोजकों ने बादल को बेस्ट ओरल प्रेजेंटेशन अवार्ड भी प्रदान किया है।
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तनाव, चिंता और भय को करेगा दूर
गामा-एमिनो ब्यूटरिक एसिड (गाबा) हमारे दिमाग में मिलने वाला एक प्रमुख अवरोधक न्यूरो ट्रांसमीटर है। यह तंत्रिका गतिविधियों को धीमा करके तनाव, चिंता और भय घटाता है। यह मस्तिष्क को शांत रखने, नींद की गुणवत्ता सुधारने और मांसपेशियों को आराम देने में भी मदद करता है।
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