ललितपुर। तहसील दिवस में न्याय की आस लेकर पहुंच रहे फरियादियों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ हो रहा है। फरियादियों के सूचीबद्ध प्रार्थना पत्र न केवल गायब हो रहे हैं, बल्कि कइयों को लंबे समय तक न्याय के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। यह विभागीय आंकड़ों से स्पष्ट हो रहा है। यह स्थिति तब है जब मुख्यमंत्री स्वयं तहसील दिवस के मामलों को देखते हैं।
जमीनों पर अवैध कब्जे, मारपीट, पेयजल समस्या, उत्पीड़न जैसे मामलों को तेजी से निपटाने के लिए महीने में दो बार तहसील दिवस का आयोजन किया जाता है। इसमें एक छत के नीचे विभिन्न विभागों के अधिकारी सुबह दस बजे से दोपहर दो बजे तक बैठकर लोगों की समस्याएं सुनते हैं और उनके निराकरण का प्रयास करते हैं। जो प्रकरण मौके पर नहीं निपट पाते हैं, उन्हें एक सप्ताह के अंदर निस्तारित कराने के लिए संबंधित विभाग के अफसरों को निर्देशित किया जाता है। यही कारण है कि शासन तहसील दिवस, समाधान दिवस, किसान दिवस जैसे आयोजनों को प्राथमिकता से ले रहा है। इसके बाद भी लोगों की समस्याओं में कमी नहीं आ पा रही हैं। इसके पीछे कारण विभागीय अफसर तहसील दिवस जैसे आयोजनों में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। मंगलवार तक बीते तहसील दिवसों के विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो तहसील दिवस में कुल 1,621 आवेदन पत्र प्राप्त हुए, इनमें 295 आवेदन समय सीमा के अंदर एवं 1,158 समय सीमा के पश्चात निस्तारित हुए। इस तरह कुल 1,453 आवेदनों का निस्तारण किया गया। वहीं, आठ आवेदन मिसिंग में बताए गए हैं, जबकि 156 आवेदन अभी भी लंबित बने हुए हैं। इससे तहसील दिवस में आवेदनों के निस्तारण की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
ललितपुर तहसील में पहुंचते सबसे ज्यादा फरियादी
ललितपुर तहसील में समस्याएं लेकर सबसे ज्यादा फरियादी पहुंचते हैं। बीते तहसील दिवसों में तालबेहट तहसील में 228, ललितपुर में 630, महरौनी में 329, पाली में 166 और मड़ावरा में 268 आवेदन प्राप्त हुए हैं। पाली तहसील में तहसील दिवसों के प्रकरणों के निस्तारण की रफ्तार अन्य तहसीलों से धीमी है। उसके बाद तहसील तालबेहट का नंबर आता है।