उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में शहर से लेकर गांव तक आवारा कुत्ते खूंखार हो गए हैं। इन आवारा कुत्तों ने तीन दिन में 242 लोगों को अपना शिकार बनाया है। इनमें से कई लोगों की हालत नाजुक है। सोमवार को भी कुत्तों ने कई लोगों को काटा। शिकायत के बाद भी प्रशासन व नगर निगम का सरकारी तंत्र बेपरवाह बना हुआ है। ऐसे में लोगों का घरों से निकलना दुश्वार हो गया है।
आवारा कुत्तों को पकड़वाने की जिम्मेदारी नगर निगम के साथ साथ नगर पालिका व नगर पंचायतों के अफसरों की है। लेकिन, जिम्मेदार विभाग के अफसर इस ओर ध्यान नहीं देते।नगर निगम में कुत्तों को पकड़ने के लिए वाहन की भी व्यवस्था है। लेकिन इस वाहन का प्रयोग कुत्तों को पकड़ने में न होकर अन्य कार्य में किया जाता है।
दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही संख्या
इसको लेकर शहर से लेकर देहात क्षेत्रों में आवारा कुत्तों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। रात के समय सुनसान रास्तों से निकलना दुश्वार होता है। वाहन की स्पीड़ अधिक तेज हुई तो यह वाहन चालक को दौड़ाते है। ऐसे में हादसा होने का खतरा बन जाता है। इसके साथ ही कोई अकेला व्यक्ति पैदल नहीं जा सकता। फिर भी अफसर कुत्तों को पकड़वाने के लिए रुचि नहीं दिखा रहे।
रेबीज के लक्षण
रेबीज रोगी को सबसे ज्यादा पानी से डर लगता है। रोगी के मुंह से लार निकलती है। यहां तक की वह भौंकना भी शुरू कर देता है।
टोटके अपनाने से बचें
ईएमओ डॉ. राहुल जैन ने बताया कि कुत्ते के काटने पर पिसी मिर्च लगाने का प्रचलन अब भी है। ऐसा करने से घाव में इंफेक्शन का खतरा ज्यादा रहता है। कुत्ते या किसी अन्य जानवर के काटने पर 72 घंटे के भीतर एंटी रेबीज वैक्सीन लगवानी चाहिए।
शिकोहाबाद क्षेत्र की कांशीराम कॉलोनी निवासी प्रतीक का कहना है कि वह 10 मार्च को परीक्षा देकर घर आ रहा था। तभी सिरसागंज क्षेत्र में कुत्तों ने उस पर हमला कर दिया। इससे वह घायल हो गया। अब कुत्तों को देखकर डर लगता है।
यशोदानगर निवासी ममता का कहना है कि वह दो दिन पूर्व घर से निकल कर जा रही थी। तभी कुत्ते लड़ रहे थे। इस बीच कुत्तों ने उस पर हमला बोल दिया और पैर में काट लिया। कुत्तों से बचने के लिए उसने दौड़ने का प्रयास किया, तो कुत्ते उसके पीछे दौड़ लिए।