रियल एस्टेट बिल बिल्डरों और डवलपर्स की मनमानी झेल रहे लखनऊ के करीब एक लाख लोगों को राहत देगा। प्लॉट और फ्लैट पर कब्जा न मिल पाने के कारण आवंटी दोहरी परेशानी झेल रहे हैं। एक तरफ वह होम लोन की किस्त चुका रहे हैं तो दूसरी तरफ मकान का किराया चुका रहे हैं।
कारपेट एरिया की जगह सुपर एरिया के आधार पर फ्लैट बेचे जा रहे हैं। पजेशन तो दूर की बात है, जमा धन वापसी में भी डवलपर्स आनाकानी करते हैं। निजी ही नहीं सरकारी आवासीय योजनाओं में भी आवंटी ठगे जा रहे हैं।
कहीं कब्जा नहीं मिल रहा तो कहीं घटिया निर्माण का दंश झेल रहे हैं। निजी कंपनियां तो हाउसिंग स्कीम के मानकों की शर्त पूरा करना तो दूर, 100 लोगों को भी गरीब आवास नहीं दे रहीं। बिल के प्रावधानों के हिसाब से आने वाले दिनों में एलडीए के अफसरों से लेकर कई नामी विकासकर्ता कंपनियों के मालिकान जेल की हवा खाएंगे।
हालांकि पहले से ही यूपी अपार्टमेंट एक्ट-2010 है, लेकिन आज तक किसी भी विकासकर्ता पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। वे आसानी से बच कर निकल जाते हैं। रियल एस्टेट बिल से उम्मीद बढी
100 लोगों को भी नहीं मिला गरीब आवासों पर कब्जा
प्रॉपर्टी
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सरकारी योजनाओं की बात करें तो सनराइज, सरगम, सृष्टि स्कीमों में पिछले पांच साल से लोगों को फ्लैटों का कब्जा प्राधिकरण विभिन्न कारणों से नहीं दे सका है। नेहरू एंक्लेव और व्योमखंड में तो स्कीम ही गायब कर दी गई थी।
इसी तरह से बिल्डर पार्श्वनाथ ने अपने विभूतिखंड स्थित अपार्टमेंट में चार साल की देरी से अब कुछ पजेशन देना शुरू किया है। ओमेक्स हाइट्स और सहारा ग्रेस अपार्टमेंट में रहने वाले घटिया निर्माण से परेशान हैं।
इसी तरह निजी कंपनियां, जिनको 20 फीसदी गरीब आवास निर्माण की शर्त पर हाउसिंग स्कीम विकसित करने के लाइसेंस दिया गया है, उन्होंने अब तक 100 लोगों को भी गरीब आवासों पर कब्जा नहीं दिया है।
3000 आवंटी चुका रहे लोन की किस्त और किराया भी। सनराइज अपार्टमेंट कानपुर रोड, सृष्टि और सरगम अपार्टमेंट कुर्सी रोड, पारिजात अपार्टमेंट फैजाबाद रोड, पंचशील अपार्टमेंट फैजाबाद रोड की आवासीय योजनाओं में पांच साल से आवंटियों को कब्जा नहीं मिल सका है। इन सभी स्कीमों में लगभग तीन हजार आवंटी पीड़ित हैं। इनमें से अनेक होम लोन की किस्त के साथ किराया भी दे रहे हैं।