05jjrp10- मोहनबाड़ी के शिव मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में मौजूद श्रद्धालु। स्रोत-आयोजक
साल्हावास। क्षेत्र के गांव मोहनबाडी के शिव मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के समापन पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी।
सुखा परिवार के सौजन्य से सातवीं पीढ़ी की तरफ से यह आयोजन उनकी स्मृति में करवाया गया है। जाखड़ 36 खाप गोशाला के प्रधान रिटायर्ड एसीपी राजबीर सिंह जाखड़ व कर्नल रणवीर जाखड़ ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा के समापन पर पूर्व मंत्री व झज्जर विधायक गीता भुक्कल ने मुख्य अतिथि के तौर पर शिरकत की। श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के समापन पर आचार्य ज्योति शंकर तिवारी ज्योति महाराज ने प्रसंगों पर प्रवचन दिए।
उन्होंने कृष्ण की लीलाओं का वर्णन किया गया। ज्योति शंकर तिवारी, ज्योति महाराज ने बताया कि मित्रता कैसे निभाई जाए यह भगवान श्री कृष्ण सुदामा से समझ सकते हैं। उन्होंने कहा कि सुदामा पत्नी के आग्रह पर मित्र से सखा सुदामा से मिलने के लिए द्वारिका पहुंचे। उन्होंने कहा कि सुदामा द्वारिकाधीश के महल का पता पूछा और महल की ओर बढ़ने लगे। द्वारपालों ने सुदामा को भिक्षा मांगने वाला समझकर रोक दिया। तब उन्होंने कहा कि वह कृष्ण के मित्र हैं।
इस पर द्वारपाल महल में गए और प्रभु से कहा कि कोई उनसे मिलने आया है। अपना नाम सुदामा बता रहा है जैसे ही द्वारपाल के मुंह से उन्होंने सुदामा का नाम सुना प्रभु सुदामा-सुदामा कहते हुए तेजी से द्वार की तरफ भागे सामने सुदामा सखा को देखकर उन्होंने उसे अपने सीने से लगा लिया। सुदामा ने भी कन्हैया-कन्हैया कहकर उन्हें गले लगाया दोनों की ऐसी मित्रता देखकर सभा में बैठे सभी लोग अचंभित हो गए। कृष्ण सुदामा को अपने राज सिंहासन पर बैठाया हुआ। उन्हें कुबेर का धन देकर मालामाल कर दिया।