उन्नाव। एनजीटी की सख्ती के बाद भी इस बार माघ मेला के दौरान शहर के गंदे नाले गंगा को प्रदूषित करेंगे। एक साल पहले एनजीटी के निर्देश पर जल निगम ने नमामि गंगे परियोजना के तहत उन्नाव और शुक्लागंज के नालों का पानी गंगा में जाने से रोकने और उसे साफ करके गंगा में छोड़ने की योजना तैयार की थी। 3.80 अरब की इस परियोजना पर अभी तक काम शुरू नहीं हो पाया है। जलनिगम एक्सईएन ने बताया कि प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल चुकी है। लेकिन कार्य प्रारंभ करने की स्वीकृति नहीं मिल पाएगी। इसके बाद ही नालों की टेपिंग और एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) बनाने का काम शुरू होगा।
शहर में जल भराव, सीवरेज और आबादी वाले क्षेत्रों में जलभराव की समस्या से निपटने के साथ ही गंगा नदी में नालों का पानी जाने से रोकने के लिए एक साल पहले जलनिगम में कार्ययोजना तैयार की थी। एनजीटी की मानकों के अनुसार कार्य योजना पर 3.80 अरब रुपये खर्च होने हैं। प्रोजेक्ट स्वीकृत होने के महीनों बाद भी नमामि गंगे प्रोजेक्ट से कार्य प्रारंभ की स्वीकृति नहीं मिल पाई है। जलनिगम के अधिकारी दिसंबर से काम शुरू होने की उम्मीद जता रहे हैं। इधर काम पूरा होने में कम से कम 6 से 8 महीने का वक्त लगेगा। यानी 15 दिसंबर से शुरू होकर 15 मार्च तक चलने वाले कुंभ मेला के दौरान भी शहर के गंदे नाले गंगाजल को दूषित करेंगे।
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दिसंबर से शुरू हो जाएगा काम
जलनिगम के एक्सईएन देवेंद्र सिंह ने बताया कि कार्य प्रारंभ की अनुमति मिलने की प्रक्रिया चल रही है। दिसंबर के प्रथम सप्ताह से निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
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यह है योजना
एनजीटी ने शहर और शुक्लागंज के आबादी व औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाले दूषित पानी को गंगा में जाने से रोकने के निर्देश दिए हैं। गंगा में गिरने वाले नालों का रुख मोड़कर उन्हें एसटीपी से जोड़कर गंदे पानी को साफ करने के बाद साफ पानी गंगा में छोड़ने की योजना है। गंगा में गिरने वाले शुक्लागंज के नालों को मोड़कर इंद्रानगर नाले से जोड़ने और यहीं एसटीपी लगाया जाएगा। वहीं उन्नाव शहर के गंदा नाला और सिटी ड्रेन को पक्का करने के साथ डकारी के पास एसटीपी बनेगा।
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शुक्लागंज में दूसरे नाले से बहा रहे पानी
शुक्लागंज में जलनिगम ने मनोहर नगर घाट निर्माण के बाद इंद्रानगर नाले का पानी गंगा में जाने से रोक दिया है। लेकिन इस नाले को रविदास नगर के नाले को जोड़ दिए जाने से आबादी क्षेत्र का पूरा पानी रविदास नगर नाले से होकर गंगा में ही जा रहा है।