झज्जर। सरकार की कार्यशैली और बढ़ते ऑनलाइन काम के बोझ को लेकर कानूनगो और पटवारी लामबंद हो गए हैं। प्रदेश भर में चल रहे धरने के चलते झज्जर में भी कानूनगो और पटवारी धरने पर बैठ गए और सरकार के खिलाफ अपना रोष जताया।
पटवारियों व कानूनगो की हड़ताल के चलते लोगों को वापस लौटना पड़ा। उनके इंतकाल, पैमाइश के काम नहीं हो सके। इसके अलावा जिले में कुल 114 लोगों ने रजिस्ट्री के टोकन कटवाए थे, जिसमें से 108 रजिस्ट्री हो सकी। बादली में 41, बहादुरगढ़ में 38, बेरी में 10, झज्जर में 3, मातनहेल में 9 और साल्हावास में 7 रजिस्ट्री हुई।
जिला प्रधान राजबीर का कहना है कि सरकार लगातार नए-नए सॉफ्टवेयर और ऑनलाइन व्यवस्थाएं लागू कर रही है, लेकिन उन्हें काम करने के लिए पर्याप्त सुविधाएं और संसाधन उपलब्ध नहीं करवाए जा रहे। ऐसे में बढ़ते काम के बोझ के बीच बेहतर तरीके से कार्य करना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने खास तौर पर इंतकाल के लिए शुरू किए गए नए सॉफ्टवेयर की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि नए सॉफ्टवेयर में कई खामियां हैं, जिसके कारण काम करने में परेशानी आ रही है। उन्होंने सरकार से मांग की कि तकनीकी समस्याओं की जिम्मेदारी पटवारियों पर डालने की बजाय आईटी सेल की जिम्मेदारी तय की जाए। इसके साथ ही जमीनों की गिरदावरी के लिए शुरू किए गए नए डीसीएस सॉफ्टवेयर को लेकर भी कर्मचारियों ने सवाल उठाए। उनका कहना है कि जब अन्य राज्यों में गिरदावरी का काम निजी एजेंसियों के माध्यम से करवाया जा रहा है तो हरियाणा में इसका अतिरिक्त बोझ पटवारियों पर क्यों डाला जा रहा है।
उन्होंने कहा कि नए सॉफ्टवेयर पर काम करने के लिए पटवारियों को पर्याप्त तकनीकी संसाधन तक उपलब्ध नहीं करवाए गए हैं। कई पटवारियों को टैबलेट तक नहीं दिए गए और इसके बावजूद नए सॉफ्टवेयर के माध्यम से काम का अतिरिक्त बोझ डाल दिया गया है। धरने पर बैठे कानूनगो और पटवारियों ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों और समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो वे दो दिवसीय सांकेतिक धरने के बाद अनिश्चितकालीन हड़ताल का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।