उफान थमने के बाद गंगा के किनारे खेतों में कटान शुरू हो गया है। धीरे-धीरे खेतों गंगा में समाने लगे हैं। दरअसल गंगा का जलस्तर बढ़ने के बाद कम हुआ है जोकि, कटान का कारण बनता है। इससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींचने लगी हैं।
बुधवार को तिगरी में गंगा का जलस्तर 199.80 मीटर आ गिरा जोकि, मंगलवार को 200 मीटर पर ठहरा हुआ है। तीन दिन पहले यह दो सौ पार कर गया था। उधर ब्रजघाट में 197.90 मीटर जलस्तर रिकार्ड किया गया। ब्रजघाट में मंगलवार को 198.15 मीटर था। यहां पर 25 सेमी की गिरावट आई है। ब्रजघाट में खतरे का निशान 199.35 पर लगा है। उधर, बिजनौर बैराज से 69417 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया है। हरिद्वार से बुधवार को गंगा में 58 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
जलस्तर में आई गिरावट के साथ ही खेतों का कटान भी होने लगा है। शीशोवाली, पप्सरा खादर, सूनपुरा, खुर्द, कला, ओसिता जगदेपुर और बिड़ला गांव का जंगल कटान से प्रभावित हो रहा है। गंगा में एक बार उफान आने के बाद अगर कम होता है तो मिट्टी कमजोर हो जाती है। जलस्तर कम होने पर यह कटकर गंगा में समाने लगती है। खेतों में कटान होने से किसानों को चिंता सताने लगी है। अभी तक इन गांव के किसान खेतों में पानी भरने से परेशान थे। चारे का संकट हो गया है। कई कई फीट पानी खड़ा होने से खेतों पर भी नहीं जा पा रहे थे। अब पानी थोड़ा कम हुआ है तो खेतों का गंगा में समान का डर बना है। उधर, बाढ़ नियंत्रण के जेई रणधीर सिंह ने जलस्तर की पुष्टि की।