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फर्जी डिप्लोमा से नौकरी करते मिले चार एक्सरे टेक्नीशियन

Thu, 22 Mar 2018 11:43 PM IST
कन्नौज, उत्तर प्रदेश
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एक्स-रे मशीन - फोटो : अमर उजाला
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जिले के अलग-अलग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चार एक्स-रे टेक्नीशियन फर्जी डिप्लोमा के  सहारे नौ साल से नौकरी करते मिले हैं। महानिदेशालय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं की जांच में फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा है। जांच की भनक लगते ही ये चारों टेक्नीशियन लंबे समय से ड्यूटी से नदारद  हैं। शासन के आदेश पर इन पर मुकदमा दर्ज कराकर अभी तक दिए गए वेतन की रिकवरी के आदेश जारी किए गए हैं। सीएमओ ने रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद शासन को अवगत कराया है।
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 बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के लिए स्वास्थ्य विभाग में शासन के निर्देश पर वर्ष 2008 में एक्सरे टेक्नीशियन के पदों पर भर्ती हुई थी। जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में नौ लोगों को इस पद पर नियुक्त किया गया। नौ सालों से इनकी ड्यूटी बिना किसी रोकटोक के चल रही थी, लेकिन नवंबर 2017 में किसी ने शासन में शिकायत कर दी कि कन्नौज के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में तैनात एक्सरे टेक्नीशियन ने फर्जीवाड़ा करके नौकरी पाई है।

 इस पर 17 नवंबर 2017 को महानिदेशालय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं के निर्देश पर मेडिकल विभाग ने 2008 में नियुक्त सभी नौ एक्सरे टेक्नीशियन के डिप्लोमा एवं पंजीकरण प्रमाण पत्रों की जांच कराई। इसमें पुष्पेंद्र सिंह पुत्र राकेश सिंह एक्स-रे टेक्नीशियन सीएचसी हसरेन, देवेंद्र पाल पुत्र जयकरन पाल एक्स-रे टेक्नीशियन सीएचसी छिबरामऊ, सैय्यद शादाब हैदर पुत्र मोहम्मद हैदर एक्स-रे टेक्नीशियन सीएचसी तिर्वा और मनोज कुमार पुत्र महेंद्र सिंह एक्स-रे टेक्नीशियन सीएचसी गुरसहायगंज का डिप्लोमा एवं पंजीकरण फर्जी पाया गया।
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गुरुवार को सीएमओ डा. कृष्ण स्वरूप ने सभी सीएचसी प्रभारियों को तत्काल प्रभाव से संबंधित थानों में फर्जी डिप्लोमा लगाकर नौकरी कर रहे उक्त चारों एक्स-रे टेक्नीशियन के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के साथ नियुक्ति तिथि से प्राप्त करने वाले वेतन की रिकवरी केे निर्देश दिए। इसके बाद तिर्वा, इंदरगढ़, छिबरामऊ व गुरसहायगंज कोतवाली में इनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई।

सीएमओ डा. कृष्ण स्वरूप ने बताया कि जांच में उक्त चारों के डिप्लोमा फर्जी पाए गए हैं। इन सभी से स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन समय निकल जाने के बावजूद किसी ने भी स्पष्टीकरण नहीं दिया। इन सभी का वेतन दो माह पहले ही रोक दिया गया है। कई बार नोटिस के बाद भी जब ये लोग उपस्थित नहीं हुए तो इनके खिलाफ संबंधित थानों में मुकदमा दर्ज कराया गया है। अब वेतन की भी वसूली की जाएगी।
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