तहसील क्षेत्र के गांवों में बीते एक सप्ताह से वायरल फीवर का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है। अस्पतालों में मरीजों की भीड़ बढ़ रही है। वहीं, कई गांवों में टीमें भी भेजी जा रही हैं।
बौहार, बांध, मैधरी, टिकवांपुर, सतरहुली, कसबा भीतरगांव और शंकरपुर सहित कई गांवों में अभी रोग काबू में नहीं आया है। भाजपा सांसद देवेंद्र सिंह भोले के गोद लिए गांव टिकवांपुर मेें भी वायरल बुखार फैलने से 50 से अधिक लोग बीमार बताए गए हैं। इनमें छोटे बच्चों की संख्या अधिक है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पिछले चार-पांच दिनों से मरीजों की संख्या में एकाएक बढ़ोत्तरी हुई है। अस्पताल के ओपीडी रजिस्टर के मुताबिक, प्रतिदिन लगभग 600 मरीज पर्चे बनवा रहे हैं। इनमें 70 फीसदी बुखार से पीड़ित हैं। अस्पताल के चिकित्साधिकारी डा. पवन सचान नेे बताया कि वायरल फीवर से ग्रस्त मरीज ज्यादा आ रहे हैं। इसे ठीक होने में कम से कम पांच दिन का समय लगता है। मरीज की हालत बिगड़ने पर एक सप्ताह का भी समय लग सकता है।
गुरुवार को सीएचसी की ओपीडी में कुल 623 पर्चे बनाए गए। वहीं, पतारा, भीतरगांव, कोरियां, बरीपाल और गिरसी सहित अन्य अस्पतालों में भी वायरल फीवर से पीड़ित मरीजों की संख्या दिनोंदिन बढ़ने के समाचार मिल रहे हैं। निजी अस्पतालों में भी बुखार के मरीज भर्ती हैं। गांवों-कसबों में झोलाछाप भी सक्रिय हैं। डाक्टरों ने बताया कि बरसाती पानी के जमाव और घरों के आसपास गंदगी जमा होने से वायरल बुखार फैल रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि सफाई कर्मचारियों के न आने से गलियों में कूड़ा-करकट जमा है और नालियां बजबजा रही हैं, जिससे संक्रामक रोगों के फैलने का खतरा बढ़ रहा है।
सीएचसी के अधीक्षक डा.सुरेंद्र सिंह सेंगर ने बताया कि वायरल फीवर से बचाव के लिए बासी भोजन, कटे फल और ठंडे पेयों के सेवन से परहेज करें, गंदे पानी के प्रयोग से बचें, घरों के आसपास गंदगी न रहने दें। रात में खुले में न सोएं और मच्छरदानी का प्रयोग करें। बुखार आने पर पैरासीटामाल की गोली लें।