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डीएलएड के लिए तलाशने पड़ रहे अभ्यर्थी

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इटावा। प्रदेश में बीते छह वर्ष से परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों की कोई भर्ती नहीं आई है। इसके चलते डीएलएड में प्रवेश के लिए अभ्यर्थियों की ओर से रुचि नहीं ली जा रही है। 24 नवंबर से डीएलएड प्रथम सेमेस्टर में दाखिले की प्रक्रिया शुरू हो गई थी।अभ्यर्थियों की ओर से कम रुचि लेने के कारण निजी कॉलेज संचालकों ने सीट भरने के लिए हाथ-पांव मारना शुरू कर दिया हैं।
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परीक्षा नियामक प्राधिकरण, प्रयागराज से शैक्षिक सत्र 2026-27 के प्रथम सेमेस्टर में दाखिले के लिए ऑनलाइन पोर्टल चालू कर दिया गया। 15 दिसंबर तक दाखिले के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जाना है। शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 16 दिसंबर निर्धारित की गई है। आवेदन की प्रति विद्यार्थी 18 दिसंबर तक ऑनलाइन प्राप्त कर सकेंगे। दाखिले की अंतिम तिथि नजदीक आते ही निजी कॉलेज संचालक सीट भरने की जुगत में लग गए हैं।
जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों को 5700 रुपये प्रति सेमेस्टर फीस जमा करनी होती है। जबकि निजी कॉलेजों में चार गुना से अधिक फीस वसूली जाती है। जिले में डायट और 31 निजी डीएलएड कॉलेज संचालित है। महेवा निवासी राहुल कुमार ने बताया कि डायट मिलने पर ही दाखिला लेंगे अन्यथा की स्थिति में निजी कॉलेज से डीएलएड करने का कोई औचित्य नहीं बन रहा है। भविष्य में भर्ती कब आएगी यह भी पता नहीं है।
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प्रशिक्षु अनुज कुमार ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2017-19 बैच डीएलएड किया था। प्रदेश में वर्ष 2018 से परिषदीय स्कूलों की शिक्षक भर्ती नहीं आई है। ऐसे में डीएलएड करने का क्या फायदा है। सरकार को पहले नई शिक्षक भर्ती लानी चाहिए।



प्रशिक्षु आशीष चतुर्वेदी ने बताया कि उन्होंने दो वर्ष पहले डीएलएड कोर्स किया था। अब फिर से डीएलएड में प्रवेश करवाए जा रहे हैं लेकिन शिक्षक भर्ती की ओर से किसी का ध्यान नहीं है। अगर भर्ती ही नहीं आएगी तो फिर डीएलएड करने से भी क्या फायदा।


डीएलएड में अधिक से अधिक अभ्यर्थी प्रवेश लें इसके लिए प्रयास किया जाता है। निजी काॅलेजों को भी सीटों को भरने के लिए प्रयास करने चाहिए। ताकि अधिकतर अभ्यर्थी डीएलएड का प्रशिक्षण करके शिक्षक बनने की प्रारंभिक योग्यता रखने के लिए पात्र हो जाए।
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मनोज कुमार, प्राचार्य डायट
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