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रेप मामलाः अनुप्रिया पटेल ने वृंदा करात पर बोला हमला, बोलीं- फैसले की कॉपी पढ़ने की नसीहत

Sun, 22 Apr 2018 09:17 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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अनुप्रिया पटेल - फोटो : अमर उजाला
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केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बच्चियों संग हो रही रेप की घटनाओं पर बड़ा फैसला लिया है। 12 साल से कम उम्र के बच्चों से अगर इस प्रकार की घटना हुई तो उसमें फांसी तक की सजा का प्राविधान है।
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रविवार को वाराणसी के पहड़िया स्थितअशोका इंस्टीट्यूट में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेने के बाद पत्रकारों से कहा कि सरकार ने यह भी तय किया कि दो महीने के अंदर जांच प्रक्रिया पूरी करनी है। दो महीने के अंदर ही मामले की सुनवाई कर फैसला करना है। यह फैसला स्वागत योग्य है। 

रेप मामले में वृंदा करात के बयान से जुड़े सवाल पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उन्हें फैसले की कॉपी पढ़ लेनी चाहिए। राहुल गांधी अमेठी को कैलीफोर्निया बनाएंगे के सवाल पर मंत्री ने कहा कि यह अमेठी की जनता को समझना चाहिए।
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बहुत लंबे समय से राहुल गांधी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। मुझे लगता है कि अगर अमेठी में कोई बदलाव होना होता तो इतने वर्षों में हो चुका होता। केंद्र में सत्ता उन्हीं की हमेशा रही है। देश में सत्ता जिसके पास होती है उसके लिए एक संसदीय क्षेत्र की तस्वीर बदलना मुश्किल काम नहीं है।

जनता खुद इसका फैसला करेगी। बनारस दौरे पर आई केंद्रीय मंत्री ने पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। साथ ही केंद्र व राज्य की योजनाओं का प्रचार प्रसार क्षेत्रों में करने को कहा।       
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वृंदा करात ने क्या कहा था..?

अशोका इंस्टीट्यूट में अनुप्रिया पटेल - फोटो : अमर उजाला
सीपीएम की नेता वृंदा करात ने बच्चियों से रेप के मामलों में कड़े कानून लाने के केंद्र सरकार के फैसले पर ऐतराज जताया है। 12 साल से कम उम्र की लड़कियों से रेप के मामलों में दोषियों के लिए मौत की सज़ा के प्रावधान पर प्रतिक्रिया देते हुए वृंदा करात ने बीजेपी सरकार पर निशाना साधा।

उनका कहना है कि यह जम्मू-कश्मीर के कठुआ में 8 साल की बच्ची के साथ रेप करने वालों को सरकार द्वारा बचाने के मामले से लोगों का ध्यान हटाने की कोशिश है। वृंदा करात ने ये बातें शनिवार को हैदराबाद में आयोजित मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के 22वें सम्मेलन में मीडिया से बातचीत के दौरान कही थी।  

उन्होंने कहा था कि संविधान में रेयरेस्ट ऑफ द रेयर (दुर्लभतम) मामलों में पहले से ही मौत की सजा का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि सैद्धांतिक तौर पर सीपीएम मौत की सज़ा के खिलाफ है। हालांकि, इस केस में असल मसला यह है कि सरकार आरोपियों को बचा रही है। 
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