झज्जर। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी विनीत कुमार की अदालत ने सड़क दुर्घटना के एक मामले में आरोपी जितेंद्र को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। लापरवाही से वाहन चलाने के कारण मौत के इस मामले में अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ अपना मामला उचित संदेह से परे साबित करने में विफल रहा।
यह दुर्घटना 24 अगस्त 2018 को रात करीब 9:30 बजे हुई थी। शिकायतकर्ता सूरत सिंह ने पुलिस को बताया था कि एक कार ने जितेंद्र की मोपेड को गलत दिशा से आकर टक्कर मार दी थी। इस दुर्घटना में जितेंद्र की मौके पर ही मौत हो गई थी। हालांकि, अदालत में गवाही के दौरान सूरत सिंह ने अभियोजन पक्ष का समर्थन नहीं किया। उन्होंने कहा कि अदालत में मौजूद आरोपी वह व्यक्ति नहीं था, जिसने दुर्घटना की थी।
आरोपी वाहन का मालिक भी नहीं था। एक अन्य गवाह राजेंद्र भी आरोपी की पहचान नहीं कर सका। वाहन मालिक सुमेर सिंह भी आरोपी के साथ वाहन के संबंध में कुछ नहीं बता पाए। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपी की पहचान स्थापित करने में विफल रहा।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ उचित संदेह से परे अपराध साबित करने में बुरी तरह विफल रहा। जांच अधिकारी स्वतंत्र गवाहों को शामिल करने में भी असफल रहे। किसी भी गवाह ने दुर्घटनास्थल पर आरोपी की पहचान नहीं की थी। अदालत ने कहा कि केवल पुलिस हिरासत में दिए गए बयान दोषसिद्धि का आधार नहीं बन सकते।
न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि अभियोजन पक्ष वाहन चालक की पहचान स्थापित करने में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी साबित नहीं कर पाया। जब चालक की पहचान ही सिद्ध नहीं हुई तो आरोपी पर लापरवाही या जल्दबाजी का आरोप नहीं लगाया जा सकता। अभियोजन पक्ष धारा 304-ए के तहत आवश्यक दोनों तत्वों को साबित करने में विफल रहा। इसलिए, आरोपी को संदेह का लाभ दिया गया और उसे सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।