कानपुर शहर के 94 उद्यमियों ने अब तक 150 करोड़ रुपये सरेंडर कर दिए हैं। 10 दिन पहले तक यह करीब 50 करोड़ रुपये था। माना जा रहा है कि 31 मार्च को योजना की समाप्ति तक यह रकम दो सौ करोड़ का आंकड़ा पार कर जाएगी।
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना सिर्फ उनके लिए है, जिन्होंने नोटबंदी के दौरान खातों में बेहिसाब नगदी जमा कराई है। शुक्रवार को ही शहर के दो डॉक्टरों ने इस योजना के तहत दो करोड़ रुपये व एक उद्यमी ने पांच करोड़ रुपये सरेंडर किए। एक दिन पहले हैलट अस्पताल के सामने स्थित ज्ञान पैथोलॉजी के संचालन ने दो करोड़ रुपये सरेंडर किए थे।
जानिए क्या है पीएमजीकेवाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह योजना उन भ्रष्ट लोगों के लिए शुरू की है जिन्होंने नोटबंदी के दौरान भारी भरकम रकम बैंकों में या डाकघर में जमा कराई, लेकिन आय का स्रोत नहीं बता पा रहे। 17 दिसंबर 2016 को शुरू हुई इस योजना के तहत यह व्यवस्था की गई है कि ऐसे लोग अपने कालेधन का 50 फीसदी जुर्माना टैक्स के रूप में जमा कर दें। इस जुर्माने की राशि का 25 फीसदी चार साल के लिए सरकार के खाते में फ्रीज कर दें। इस पर कोई ब्याज देय नहीं होगा। यह रकम देश के गरीबों के कल्याण में लगाई जाएगी। इस वजह से योजना का नाम प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना रखा गया। यह 31 मार्च 2017 तक चलेगी। शेष बची 25 फीसदी रकम सफेद धन माना जाएगा।
ऐसे समझें
अगर आपकी अघोषित आय 10 लाख निकलती है तो आपको 10 लाख का 30 फीसदी यानी तीन लाख रुपये आमदनी टैक्स देना होगा। उसके अलावा 10 फीसदी यानी एक लाख रुपये इनकम पर पेनाल्टी के रूप में देना होगा। 30 फीसदी का 33 फीसदी यानी तीन लाख का 99 हजार रुपये आपको सरचार्ज देना होगा। इस हिसाब से आपको 10 लाख पर 50 फीसदी जुर्माना यानी 4,99,000 रुपये टैक्स के रूप में चुकाना होगा। इसकेअलावा घोषित की गई रकम का 25 फीसदी हिस्सा प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत जमा कराना होगा। इस रकम पर कोई ब्याज नहीं मिलेगा। यह रकम चार साल तक ब्लॉक रहेगी।