शहर में संचालित औद्योगिक इकाईयों के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने संयुक्त ट्रीटमेंट प्लांट बनाने के निर्देश नगर पालिका को दिए हैं। इस पर होने वाला खर्च औद्योगिक इकाईयों को देना होगा।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने अब कांतानाथ चतुर्वेदी की याचिका में नगर पालिका को भी शामिल कर लिया है। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान पालिका के ईओ डा. ब्रजेश कुमार ने एनजीटी में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस दौरान एनजीटी ने पालिका को आदेशित किया कि शहर और आसपास स्थापित औद्योगिक इकाईयों के पानी को यमुना में गिरने से रोकने के लिए औद्योगिक संयुक्त ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया जाए। इसकी स्थापना और संचालन की जिम्मेदारी भी नगर पालिका को संभालनी होगी। इस पर आने वाला खर्च संबंधित औद्योगिक इकाईयों को देना होगा।
इस पर पालिका ईओ डा. ब्रजेश कुमार ने अपना पक्ष रखते हुए सुझाव दिया कि सभी औद्योगिक इकाईयां एक स्थान पर स्थिति होने की स्थिति में औद्योगिक संयुक्त ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना और संचालन संभव है। वर्तमान दशा में यह व्यवस्था प्रभावी नहीं हो सकती है। इस पर अब 28 अप्रैल को होने वाली अगली सुनवाई में विचार हो सकता है।