आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों और नक्सली वारदातों के पीड़ितों के लिए देश में पहली बार एक टाउनशिप का निर्माण किया जा रहा है। दंतेवाड़ा जिले के पुलिस अधीक्षक अभिषेक पल्लव के मुताबिक, इस टाउनशिप का निर्माण आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली खुद ही कर रहे हैं।
पल्लव ने बताया कि इस टाउनशिप में एक कौशल विकास केेंद्र का भी निर्माण जाएगा, जिससे पूर्व नक्सलियों और उनके पीड़ितों को आत्मनिर्भर बनने में मदद की जा सके। उन्होंने कहा, इस केंद्र में टाउनशिप में रहने वालों को विद्युत कार्य, मरम्मतीकरण, वैज्ञानिक खेती और गो पालन जैसे विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े स्किल सिखाए जाएंगे, ताकि वे अपने गांवों में रोजगार सृजित कर सकें।
पल्लव ने कहा, हमने करीब एक साल पहले ‘लोन वरातु’ अभियान शुरू किया था, जिसका मतलब घर वापसी होता है। एक साल में 381 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जिनमें 101 के ऊपर इनाम घोषित था। उन्होंने कहा, इनमें से कुछ नक्सलियों ने गांव वापस लौटने पर अपने ऊपर हमने का डर जताया और दंतेवाड़ा में ही रहने की इच्छा जताई। इसलिए हमने इस खास टाउनशिप के निर्माण का निर्णय लिया।
पल्लव के मुताबिक, इस टाउनशिप में एक कमरे वाले 108 मकान और 20 दुकान बनाए गए हैं। इसमें एक स्वास्थ्य केंद्र और एक चाइल्ड केयर सेंटर भी बनाया गया है। साथ ही एक 20 कमरों का ट्रांजिट हॉस्टल भी बनाया गया है, जहां नक्सलियों के हमलों के शिकार ग्रामीण अस्थायी तौर पर रह पाएंगे। उन्होंने बताया कि इस टाउनशिप का निर्माण उन्हीं नक्सलियों ने खुद किया है, जो एक समय घरों को तहस-नहस करने में शामिल रहते थे।
नहीं थे सरकारी दस्तावेज, अब ले पाएंगे योजनाओं का लाभ
एसपी अभिषेक पल्लव के मुताबिक, एक साल के घर वापसी अभियान के बाद सरकार को पता चला कि आत्मसमर्पण करने वाले केवल 32 नक्सलियों के पास आधार कार्ड या बैंक खाता था और अन्य को सरकार की तरफ से शुरू की गई किसी भी योजना का लाभ नहीं मिला था। उन्होंने कहा, इसके बाद हमने ‘लोन वरातु अभियान-2’ की शुरुआत की, जिसके तहत 250 नक्सलियों को आधार कार्ड जारी किए गए और बैंक खाते खोले गए। अब वे सरकार की 12 योजनाओं का लाभ ले सकेंगे।