क्रिकेटर युवराज सिंह का पारिवारिक विवाद दो साल से पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में चल रहा है। केस में 19 सुनवाइयां हो चुकी हैं और अब हाईकोर्ट ने झटका दे दिया। दरअसल, हाईकोर्ट ने सोमवार को युवराज सिंह की ओर से उनके छोटे भाई जोरावर सिंह के वैवाहिक विवाद पर मीडिया में समाचार प्रकाशित करने पर रोक की अपील खारिज कर दी है।
याचिका पर दो वर्ष के दौरान 19 सुनवाई हुई, पर वह साबित नहीं कर पाए कि मीडिया कवरेज करते हुए संयम खो रहा है। पिछली सुनवाई पर ही हाईकोर्ट ने याचिका को औचित्य विहीन कहा था, तब युवराज के वकील ने जवाब के लिए समय की मांग की थी। मामले में याचिकाकर्ता की दलीलों को नाकाफी बताते हुए हाईकोर्ट ने सोमवार को याचिका खारिज कर दी।
मीडिया पर परिवारिक मामले में दखलअंदजी का आरोप
युवराज सिंह
जून 2015 में पहली सुनवाई पर ही हाईकोर्ट ने यह कहा था कि संविधान से प्राप्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर महज इस अंदेशे से कि इस मामले में मीडिया में समाचार प्रकाशित होने से उनकी साख खराब होगी, रोक नहीं लगाई जा सकती।
तब से अब तक सवा दो साल और 19 सुनवाई बीत गई, परंतु किसी भी पक्ष को नोटिस तक जारी नहीं किया गया और अब याचिका को खारिज कर दिया गया। युवराज सिंह, उनकी मां शबनम सिंह और जोरावर सिंह ने मीडिया पर परिवारिक मामले में दखलअंदजी का आरोप लगाते हुए प्रतिबंध की मांग की थी।
आरोप यह भी है कि जोरावर की पत्नी के परिवार वाले उनकी छवि खराब करने की कोशिश कर रहे है और प्रेस कांफ्रेंस कर उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया जा सकता। हाईकोर्ट ने कहा था कि संविधान में हर किसी को अपनी बात कहने की आजादी है, बशर्ते वह एक सीमा में हो।
इस मामले में याचिकाकर्ता के ससुराल वाले अगर कोई प्रेसवार्ता करते हैं तो मीडिया के प्रकाशित करने पर रोक कैसे लगाई जा सकती है।