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हरियाणा: कोरोना के दांव में फंसे पहलवान, दंगल बंद होने से अब खेती करने को मजबूर

Fri, 18 Jun 2021 11:54 AM IST
निवेदिता वर्मा सोम दत्त, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

कोरोना काल के चलते मजबूरी में कई खिलाड़ी घर बैठ गए। क्योंकि खिलाड़ी को अच्छी खुराक की जरूरत होती है, जो महंगी होती है। ऐसे में पहलवान दूसरे काम धंधे ढूंढ रहे हैं।  
 
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अखाड़े में पहलवान। - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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हरियाणा के दंगलों में अपना दम खम दिखाने वाले पहलवान अब जीवन यापन के लिए कठिनाई के दौर से गुजर रहे हैं। पिछले डेढ़ साल से कोरोना के चलते प्रदेश में दंगल और अन्य प्रतियोगिताएं बंद हैं। इससे पहलवानों की आय बंद हो गई है। हालात ये हैं कि कई पहलवान तो अपना खेल छोड़कर घर बैठ गए, जबकि काफी ऐसे हैं, जिन्होंने किसी दूसरे रोजगार की तलाश कर ली है।

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ज्यादातर अब अपने परिवार के साथ खेती के कार्यों में मदद कर रहे हैं। पहलवानों से मेडल की उम्मीद करने वाली सरकारों से अब पहलवान मदद की आस लगाए बैठे हैं। प्रदेश में सैकड़ों की संख्या में अखाड़े हैं और हजारों की संख्या में पहलवान हैं, जो कोरोना काल के दांव में फंस गए हैं।


पहले हर माह कमा लेते थे 20 हजार रुपये, अब खाली
करनाल के गांव खेड़ी मान सिंह में अखाड़ा संचालक रमेश संधू का कहना है कि उनके पास 30 पहलवान हैं। कोरोना के कारण पहलवानों के सामने परेशानी आ रही है। पहले हर पहलवान दंगलों या अन्य प्रतियोगिताओं में जाकर 20 से 25 हजार रुपये कमा लेते थे। पिछले डेढ़ साल से कोई प्रतियोगिता नहीं हो रही है, इस कारण अब मजबूरी में पहलवानों को दूसरे काम करने पड़ रहे हैं। कई फिर अपने पुश्तैनी काम खेती में हाथ बंटवा रहे हैं। पहलवान सुमित, अमित कुमार ने बताया कि दंगल नहीं होने से उनकी आजीविका प्रभावित हो रही है। सरकार की तरफ से हर साल एक करोड़ का भारत केसरी दंगल होता था, वो भी बंद है। 
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खिलाड़ी छोड़ रहे खेल, सरकार लाए पॉलिसी : हरीश पूनिया
गांव बड़ौता में अखाड़ा संचालक हरीश पूनिया कहते हैं कि कोरोना काल के चलते मजबूरी में कई खिलाड़ी घर बैठ गए। क्योंकि खिलाड़ी को अच्छी खुराक की जरूरत होती है, जो महंगी होती है। लेकिन पिछले डेढ़ साल से खिलाड़ियों के पास आय के कोई स्रोत नहीं हैं। सरकार को चाहिए कि वह ऐसे खिलाड़ियों के लिए भी कोई पॉलिसी बनाए, ताकि खिलाड़ी अपनी तैयारी लगातार जारी रख सकें और उनका जीवन यापन चलता रहे। हमारे अखाड़े से अन्नू पहलवान, शिवानी, सीमा नेशनल और इंटरनेशल स्तर पर खेल चुकी हैं।

हरियाणा में जूनियर, सब-जूनियर व यूथ कैटेगरी के तहत पदक विजेता खिलाड़ियों को कैश अवार्ड मिलता है। प्रदेश सरकार खिलाड़ियों के लिए लगातार बेहतर नीतियां लेकर आ रही है। जहां तक दंगल की बात है तो वो कोरोना चलते अभी नहीं कराए जा सकते। खिलाड़ियों की जान की सुरक्षा सबसे अहम है। यह लड़ाई हम सबको मिलकर लड़नी है। -संदीप सिंह, खेल राज्य मंत्री

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