कृषि कानून वापस लेने के फैसले के बाद चंडीगढ़ में मिठाइयां बांटी गई।
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चंडीगढ़ में कामकाजी और गृहणी महिलाओं ने किसान आंदोलन में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। लगभग एक साल से शहर के चौक और लाइटों पर हकों के लिए डटी रहीं। महिलाओं ने बताया कि पति सरकारी नौकरी में होने के कारण प्रदर्शन में हमारे साथ नहीं खड़े हो सकते थे, लेकिन हम इस सरकार के बंधन से आजाद थी। ससुराल पक्ष और मायका पक्ष दोनों ही खेतीबाड़ी करने वाले हैं, इसलिए किसानों की बेटी और बहू होने का फर्ज अदा किया। क्योंकि हमने घरों में किसान परिवार की परेशानी और तनाव देखा है।
किसान की बेटी होने के नाते ये मेरा फर्ज
ये किसानों की एकता की जीत है। किसान की बेटी और बहू होने के नाते किसानों के लिए खड़ा होना मेरा फर्ज था। पति सरकारी नौकरी के कारण साथ नहीं दे सकते थे, लेकिन मैं एक साल से प्रदर्शन के लिए आ रही। कई बार बच्चे भी साथ देने के लिए साथ आते थे।
- गुरमीत कौर, गृहणी, सेक्टर-23
महंगाई के लिए लड़ने की जरूरत
शहरवासियों को किसानों के आंदोलन से सीखना चाहिए। उन्होंने अपनी परेशानियों के लिए एकता दिखाई और जीत हासिल की। महंगाई इतनी ज्यादा बढ़ गई है, शहर के लोगों को भी इसके लिए एकजुट होकर आवाज उठानी चाहिए। शुरू से ही आंदोलन में हिस्सा लेती रही हूं। क्योंकि परिवार खेती से जुड़ा है।
- शरणजीत कौर, सेक्टर-23
खाना बनाते समय भी प्रदर्शन के गीत गाते रहे
शुरू से ही किसान प्रदर्शन में शामिल होते रहे हैं। घर में खाना बनाते समय भी प्रदर्शन के गीत ही दिमाग में चलते रहते थे। हर शाम को समय निकालकर दो से चार घंटे सेक्टर-17 और 16 के लाइट प्वाइंट व मटका चौक पर प्रदर्शन के लिए आते रहे हैं। आज एकता की जीत हुई है।
- नीतू कंबोज, सेक्टर-23
रोटी से जुड़ा है आंदोलन, एकजुट होना जरूरी
आंदोलन में शामिल होने का मकसद ये नहीं था कि मैं खेती परिवार से संबंध रखती हूं। चूंकि ये आंदोलन रोटी से जुड़ा था, जो किसानों और आम आदमी दोनों का मुद्दा है। महंगाई भी बढ़ रही है, इसका नुकसान शहरवासियों को अधिक है। हमें परेशानियों और तकलीफों के खिलाफ एकजुट होना चाहिए।
- कुलविंदर, सेक्टर-11