चंडीगढ़ का मटका चौक किसान आंदोलन का गवाह बन गया है। किसान आंदोलन के बढ़ते रूप में किसान और उनके समर्थक पुलिस के साथ संघर्ष करते रहे। इस दौरान कई बार उनका टेंट उखाड़ा गया। बाबा लाभ सिंह को थाने ले जाया गया, लेकिन लोग फिर मौके पर पहुंचे और कृषि कानून बिलों के खिलाफ अड़े रहे। शुक्रवार को तीनों कृषि कानून बिलों को वापस लेने की घोषणा होते ही मटका चौका पर उत्साह का माहौल हो गया।
लोग ढोल नगाड़े की थाप पर झूमने लगे। लाभ सिंह ने कहा कि जब तक कृषि कानून बिल वापस नहीं होते, तब तक वह घर नहीं जाएंगे। लाभ सिंह ने कहा कि यह किसानों के संघर्ष की जीत है। बाबा लाभ सिंह कृषि कानूनों को रद्द कराने के लिए चंडीगढ़ के मटका चौक पर धरने पर बैठे हैं। उन्होंने कहा कि 700 से अधिक किसान शहीद हुए हैं। सर्दी, गर्मी और बरसात को हमने झेला है। कानून रद्द होने के बाद ही अब घर जाएंगे।
बाबा लाभ सिंह से मिलने पहुंचे थे कई नेता
बाबा लाभ सिंह के जज्बे को देखकर मटका चौक पर शिअद प्रधान सुखबीर बादल, गुरनाम सिंह चढ़ूनी, राकेश टिकैत, पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत सहित तमाम किसान नेता मिलने आए थे।
बिलों के लिए राजन बैंस ने त्यागे थे जूते, अब सिंघु बॉर्डर पर जाकर पहनेंगे
चंडीगढ़ से सटे गांव कांसल निवासी राजन बैंस बीते 10 महीनों से बिना जूता-चप्पल के हैं। सर्दी, गर्मी और बारिश में भी उन्होंने अपनी जिद नहीं छोड़ी। यहां तक कि उन्होंने अपनी बहन की शादी में भी जूते नहीं पहने। राजन बैंस ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा का जो भी संदेश होगा उस पर अमल करेंगे। राजन बैंस का कहना है कि अब तो सिंघु बार्डर पर जाकर ही जूते पहनेंगे।
तीन बार मटका चौक से उखाड़ा गया टेंट, अब जीतकर ही घर जाएंगे
मटका चौक से तीन बार पुलिस ने टेंट उखाड़े, लेकिन हम सभी डटे रहे। सबसे पहले छतरी लगाई थी। उसे भी पुलिस ने उठा लिया। उसके बाद तिरपाल लगाया और कुछ दिन के बाद पुलिस ने उसे भी हटा लिया और बाबा लाभ सिंह को थाने ले गई। उसके बाद हमने थाने का घेराव किया। पुलिस ने तीन बार टेंट उखाड़ा। उसके बाद रोज गार्डन के दीवार के साथ पक्का टेंट लगाया। अब जीत कर ही घर जाएंगे। -सतनाम सिंह, किसान एकता मटका चौक
रुकने की नहीं थी व्यवस्था, तीन माह बाबा को अपने घर ले गया
मार्च से जून तक बाबा लाभ सिंह को रुकने के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी। इसके बाद उन्हें अपने घर लेकर गया। जब मटका चौक पर पक्का मोर्चा लगा, तब से बाबा मटका चौक पर हैं। किसानों की सच की लड़ाई है। सच की जीत होती है। बहुत खुशी है कि प्रधानमंत्री ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा कर दी। अब जीत दूर नहीं है। -जगजीत सिंह बाजवा, मटका चौक
रात की ड्यूटी को भी बखूबी निभाया
मटका चौक के टेंट पर रात के समय एक व्यक्ति को रुकना होता था। इसके लिए मुझे जिम्मेदारी दी गई। तीन महीना तक लगातार रात में मटका चौक पर जाकर बाबा के साथ रहता था। इस कार्य में मेरा परिवार और पत्नी ने भरपूर साथ दिया। घर का काम घर के लोग संभालते रहे। आज परिवार के हर चेहरे पर किसानों की जीत की खुशी है। यह पूरे देश के किसानों की जीत है। -गुरदीप सिंह दिप्पी, मटका चौक