निलंबन अवधि को सेवा का हिस्सा न मानने के हरियाणा सरकार के आदेश के खिलाफ 10 साल कानूनी लड़ाई लड़ दम तोड़ने वाले मृतक कर्मचारी की विधवा ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से इंसाफ की गुहार लगाई है। हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए याची के मांगपत्र पर हरियाणा सरकार को निर्णय लेने का आदेश दिया है।
याचिका दाखिल करते हुए पलवल निवासी 72 वर्षीय प्रकाशी ने एडवोकेट एमडी खान और किरणदीप कौर के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया कि याची के पति की 1984 में पटवारी के तौर पर हथीन में नियुक्ति हुई थी। 1994 में उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी और विभाग ने उन्हें निलंबित कर दिया था। इस मामले में 1997 में जिला अदालत ने उन्हें बरी कर दिया था। बरी होने के बाद से ही वह बहाली के लिए सरकार से निवेदन करते रहे लेकिन उन्हें बहाल नहीं किया गया। आखिरकार अक्तूबर 2008 में निलंबन के 14 साल बाद उन्हें बहाल किया गया। इसके बाद उन्होंने निलंबन अवधि के दौरान का वेतन व अन्य लाभ देने का निवेदन किया, जिसे 2011 में सरकार ने खारिज कर दिया।
निलंबन अवधि को सेवा का हिस्सा न मानते हुए उन्हें किसी भी लाभ से इन्कार कर दिया गया। इसके बाद भी याची ने अपने हक की लड़ाई जारी रखी और हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी। हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर सरकार को मांगपत्र सौंपने का आदेश दिया था। याची के पति ने मांगपत्र सौंपा लेकिन कोई निर्णय नहीं हुआ। इस दौरान 2021 में हक की लड़ाई लड़ते हुए उनकी मौत हो गई। अब महिला ने निलंबन अवधि को मृतक पति की सेवा में जोड़ने, इसके आधार पर वेतन तय करने, फैमिली पेंशन व अन्य लाभ जारी करने की मांग की है। हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए हरियाणा सरकार को दो माह के भीतर मांगपत्र पर निर्णय लेने का आदेश दिया है।