मामला शहर के एक सरकारी स्कूल का है। बताया गया है कि तीनों छात्राओं का मन पढ़ने में नहीं लगता। वे अक्सर कक्षाओं से गायब रहती थीं। न तो ऑनलाइन कक्षा में आती थीं और न ही ऑफलाइन में। उनकी कक्षा के एक वरिष्ठ अध्यापक ने इस बात का संज्ञान लिया और उनसे कहा कि यदि आगे भी उनका यही रवैया रहा तो वे इस मामले में सख्ती करेंगे। इस चेतावनी का छात्राओं पर कोई असर नहीं पड़ा और वे पहले की तरह कक्षाओं से बंक मारती रहीं।
उसके बाद अध्यापक ने उन्हें डांटा और कहा कि वे जल्द ही इस बारे में उनके अभिभावकों से बात करेंगे। इससे छात्राएं डर गईं और उन्हें लगा कि यदि यह बात घर तक पहुंच गई तो उनकी पोल-पट्टी खुल जाएगी। इसके बाद योजना बनाकर इन छात्राओं ने शिक्षक पर गंभीर आरोप लगाते हुए शिक्षा अधिकारियों को शिकायत दे दी। यौन शोषण के आरोप से अधिकारी भी सकते में आ गए और उन्होंने मामले की जांच के लिए पहले स्कूल स्तर और उसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी के नेतृत्व में जांच कमेटी गठित की। दोनों कमेटी के सदस्यों ने जब पूछताछ की तो छात्राएं अपने आरोपों से मुकर गईं।
छात्राओं ने माना कि उनके कक्षाओं से गैरहाजिर रहने पर अध्यापक ने उन्हें फटकार लगाई थी। इससे वे नाराज चल रही थीं और अध्यापक को सबक सिखाने के लिए उन्होंने यौन शोषण का आरोप लगाया था। बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए काम करने वाली संस्था चंडीगढ़ कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (सीसीपीसीआर) इस पूरे मामले में अपनी नजर बनाए हुए है।
इस मामले में जब शिक्षकों से बात की गई तो उन्होंने बताया कि कोरोना काल में विद्यार्थियों की पढ़ने की आदत छूट गई है। पढ़ने के लिए कहने पर अगर छात्र-छात्राएं ऐसे गंभीर आरोप लगाएंगे तो शिक्षक कैसे पढ़ाएंगे। यूटी शिक्षक संघ के अध्यक्ष स्वर्ण सिंह कंबोज ने बताया कि हम शिक्षक के साथ हैं। शिक्षक की ऐसे मामलों में बहुत प्रताड़ना होती है। विद्यार्थियों की इन सब विषयों पर काउंसलिंग होनी चाहिए।
शिक्षा विभाग की ओर से पहले स्कूल स्तर और फिर जिला शिक्षा अधिकारी स्तर पर आरोपों की जांच की गई। पूछताछ में लड़कियों ने खुद यौन शोषण के आरोपों को झूठा बताया और कहा कि शिक्षक की ओर से पढ़ाई को लेकर की जा रही सख्ती से वह नाराज थीं, इसलिए उन्होंने शिक्षक पर इस तरह का आरोप लगा दिया।
- रूबिंदरजीत सिंह बराड़, शिक्षा निदेशक
मामला हमारे संज्ञान में आने पर हमने छात्राओं को पुलिस शिकायत करने की सलाह दी थी। शायद पुलिस के पास शिकायत दर्ज करवाई गई है। सीसीपीसीआर सिर्फ मामले की निगरानी कर रहा है। अभी हमें स्कूल और शिक्षा विभाग की जांच कमेटी की ओर से की जांच की रिपोर्ट नहीं मिली है। - हरजिंदर कौर, अध्यक्ष, सीसीपीसीआर