मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पंजाब के ट्रांसपोर्टरों को बड़ी राहत देते हुए एलान किया है कि कोरोना महामारी के कारण जो ट्रांसपोर्टर अपने वाहनों का टैक्स नहीं भर सके थे, वे अगले तीन महीने में बिना किसी जुर्माने या एरियर से बकाया टैक्स जमा करवा दें। ट्रांसपोर्टरों को यह मोहलत 25 अप्रैल से 24 जुलाई 2022 तक अवधि के लिए दी गई है।
राज्य सरकार का मानना है कि इस फैसले से कैब चालकों और ऑटोरिक्शा चालकों को भी लाभ होगा। मुख्यमंत्री ने ट्वीट करते हुए लिखा- ‘अपने ट्रांसपोर्टर साथियों के साथ किया वादा आज हम पूरा कर रहे हैं। ट्रांसपोर्टर हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। हम हर जरूरत में उनके साथ खड़े हैं।’
इससे पहले शनिवार सुबह मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर संकेत दिया था कि वह पंजाब के ट्रांसपोर्टरों के लिए आज बड़ा फैसला लेने जा रहे हैं। यह जानकारी बाद में आम आदमी पार्टी के सीनियर नेता और मुख्य प्रवक्ता मलविंदर सिंह कंग ने भी दी। उन्होंने अपने फेसबुक पेज पर लिखा कि पंजाब के ट्रांसपोर्टरों के लिए मुख्यमंत्री भगवंत मान आज अहम फैसला लेंगे।
उल्लेखनीय है कि पंजाब में निजी ट्रांसपोर्टरों की कार्यप्रणाली लंबे समय से सरकारी ट्रांसपोर्ट सिस्टम के साथ टकराव का मुद्दा बनी रही है। इसका एक मुख्य कारण यह भी रहा कि पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के परिवार सहित अकाली दल और कांग्रेस के अनेक नेता ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़े हैं। इसके चलते यह आरोप लगते रहे कि सूबे में जिस पार्टी की सरकार रही, उनके नेताओं की बसों को सरकारी बसों के मुकाबले ज्यादा रूट परमिट, लाइसेंस और रूट पर ज्यादा चक्कर दिए जाते रहे। इससे सरकारी ट्रांसपोर्ट सिस्टम घाटे का शिकार होता रहा।
सूत्रों के अनुसार, शनिवार को मुख्यमंत्री द्वारा उक्त घोषणा किए जाने से पहले ट्रांसपोर्ट विभाग के अधिकारियों के साथ पूरे मामले की समीक्षा भी की गई, जिसमें निजी बसों को एक से अधिक परमिट, एक ही परमिट पर कई निजी बसों के चलने जैसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए विभाग को यह निर्देश भी दिए गए हैं कि सभी बस अड्डों पर विभाग अपने स्तर पर सरकारी व निजी बसों के आने-जाने और रूटों पर नजर रखे। इसके अलावा निजी बसों से बस अड्डों पर बनता रूट चार्ज भी तुरंत वसूल किया जाए। इसके साथ ही पूरे राज्य में 54 अधिकारियों को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे निजी बस मालिकों द्वारा लाइसेंस फीस और बसों के परमिट संबंधी शुल्क की वसूली में कोताही न करें। साथ ही, व्यस्त रूटों पर निजी और सरकारी बसों के रूटों में सामंजस्य बनाकर ही समय सारिणी तैयार करें।