डीजीपी ने बताया कि 2-3 किलोमीटर का सफर तय करने में सक्षम ये ड्रोन नशे की खेप लाने के लिए भारत की ओर से पाकिस्तान भेजे जा रहे थे। इन्हें पांच बार इस्तेमाल किया गया है। इसे लेकर पूछताछ चल रही है। इस मॉड्यूल के सदस्यों का कहना है कि वे पिछले कुछ महीने पहले ही सरहद पार से नशे और हथियारों की तस्करी में शामिल हुए हैं। इसके साथ ही पाकिस्तान के कुछ नशा तस्करों का भी पता लगा है जो सरहद पार से नशे और हथियार भेज रहे थे। वहीं, डीजीपी ने इस मामले में ड्रग्स बरामद किए जाने के बारे में फिलहाल कुछ कहने से इनकार कर दिया।
पकड़े गए तस्कर अमृतसर, करनाल और अंबाला निवासी
डीजीपी के अनुसार गिरफ्तार किए तीनों व्यक्तियों की पहचान धर्मेंद्र सिंह पुत्र हरी सिंह निवासी गांव धनोआ खुर्द जिला अमृतसर, राहुल चौहान पुत्र शीश पाल चौहान निवासी 37-ई पूजा विहार अंबाला कैंट और बलकार सिंह निवासी गांव कालस, पुलिस थाना सराए अमानत खान, अमृतसर (ग्रामीण) के तौर पर हुई है।
धर्मेंद्र को भारत-पाक सरहद से तीन किलोमीटर दूर गांव हरदो रत्न से गिरफ्तार किया गया है। वहीं बलकार एनडीपीएस एक्ट के एक केस में अमृतसर जेल में बंद था। उसे वीरवार को प्रोडक्शन वारंट पर लाया गया था। सेना में नायक राहुल चौहान ड्रोन खरीदने, सप्लाई करने और सरहद पार के तस्करों को प्रशिक्षण देने में शामिल रहा है।
प्राथमिक जांच में इस बात की भी पुष्टि हुई है कि राहुल भारत-पाक के अपने साथियों समेत हेरोइन और हथियार उठाने और ड्रोन चलाने में सीधे तौर पर शामिल रहा है। वह और उसके साथी इनक्रिप्टड ओटीटी प्लेटफार्मों के जरिये पाकिस्तानी तस्करों के साथ सीधे संपर्क में थे। इसके अलावा द्विपक्षीय संचार की सुविधा देने के लिए सरहद पार से एक वॉकी टॉकी सेट को पाकिस्तान भेजने की योजना भी बनाई गई थी।
पंजाब पुलिस ने ड्रग्स तस्करों के एक बड़े मॉड्यूल का खुलासा किया है। उनके पास से दो ड्रोन भी बरामद हुए हैं। चीनी कंपनी द्वारा निर्मित पहला ड्रोन डीजेआई इंसपायर-2 ड्रोन (क्वार्ड कॉप्टर) है। इसे मोधे गांव थाना घरिंडा जिला अमृतसर (ग्रामीण) की एक वीरान सरकारी डिस्पेंसरी की इमारत से बरामद किया गया। इस ड्रोन को यहां तस्कर धर्मेंद्र सिंह और उसके साथी ने छुपाया था।
दूसरा ड्रोन भी चीनी कंपनी का बनाया डीजेआई मैट्रिस 600 पीआरओ (हैक्सा कॉप्टर) है, जो तस्करी में शामिल राहुल चौहान के खुलासे के बाद करन विहार, सेक्टर-6, करनाल (हरियाणा) के एक घर से बरामद किया गया। यह घर राहुल चौहान के एक दोस्त का है।
डीजीपी दिनकर गुप्ता ने बताया कि सेना नायक राहुल ने खुलासा किया कि उसने 2019 में ओएलएक्स से काले रंग का आंशिक तौर पर खराब एक ड्रोन-ऐसपायर 02 मॉडल 1.50 लाख रुपये में खरीदा था। ड्रोन की मरम्मत करने के बाद उसने इसे लगभग 2.75 लाख रुपये में ओएलएक्स पर ही बेच दिया।
इस रकम से उसने पुणे से एक नया ड्रोन डीजेआई इंस्पायर 02 मॉडल तकरीबन 3.20 लाख रुपये में खरीदा और इसे अमृतसर के एक अपराधी को 5.70 लाख रुपये में बेच दिया। उसने एक और ड्रोन डीजेआई मैट्रिस 600 को लगभग 5.35 लाख रुपये में खरीदा। उसने इसे करनाल में छुपाकर रखा था। वहीं से इसे बरामद किया गया है।
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सरहद पर हाल ही में ड्रोन की हो रही गतिविधि पर चिंता जाहिर की थी, जो जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने के बाद अगस्त 2019 में पहली बार सामने आई। उन्होंने केंद्रीय एजेंसियों से मामले की बारीकी से जांच कराने के लिए यह मुद्दा केंद्र के समक्ष उठाया।
केंद्र सरकार की ओर से ड्रोन के प्रयोग संबंधी पहले ही एसओपी जारी किया गया है। केंद्र के मुताबिक ड्रोन का प्रयोग वीआईपी को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है। इस संबंध में डीजीपी से पूछे जाने पर उन्होंने माना कि ड्रोन गतिविधियों से वीआईपी की सुरक्षा को खतरा बढ़ा है और ज्यादा चौकसी बरती जा रही है।
उन्होंने बताया कि पंजाब पुलिस ने सरहदी इलाकों में ड्रोन और अन्य साधनों से हथियारों और नशों की तस्करी के मद्देनजर सरहदी क्षेत्रों की निगरानी और जांच के लिए एक मुहिम चलाई है। इसके तहत सरहदी क्षेत्रों में विशेष नाके स्थापित किए गए हैं।
डीजीपी दिनकर गुप्ता ने बताया कि जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद पाकिस्तान की ओर से ड्रोन के जरिए भारत में हथियारों की सप्लाई करने की कोशिशें तेज की गईं। उन्होंने बताया कि ड्रोन के जरिए भारतीय सीमा में हथियार गिराए जाने की पहली घटना 5 अगस्त 2019 को सामने आई और उसके बाद सितंबर माह के दौरान पाकिस्तान की ओर से ड्रोन के जरिए भारत में हथियार गिराए गए थे।
13 अगस्त, 2019
अमृतसर में भारत-पाक सीमा से महज डेढ़ किलोमीटर दूर मोहावा गांव में एक धान के खेत में दुर्घटनाग्रस्त हुए ‘हेक्साकोप्टर ड्रोन’ की बरामदगी हुई। यह बरामदगी अमृतसर (ग्रामीण) पुलिस को आई एक अज्ञात फोनकाल के बाद हुई थी, जिसमें जानकारी दी गई कि मोहावा गांव के धान के खेतों में पंखे जैसी कोई चीज दिखाई दी है।
25 सिंतबर 2019
तरनतारन पुलिस ने झब्बाल नामक जगह से एक नष्ट किए गए ड्रोन को बरामद किया। जांच में खुलासा हुआ कि खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स और खालिस्तान लिबरेशन फोर्स के आतंकवादियों ने हथियारों की खेप भारत भेजने के लिए कम से कम 4 ड्रोन का इस्तेमाल किया, जो 7-8 बार भारतीय सीमा में घुसे थे। पाकिस्तान में बैठे खालिस्तान लिबरेशन फोर्स और खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स के आतंकवादी अब तक ड्रोन के जरिए भारत में (12 सितंबर से 24 सितंबर) 12 दिनों में 16 असॉल्ट राइफल्स भेज चुके थे, जिनमें 4 एके-56, 5 एके-47 और 5 एके-74 राइफल शामिल थीं। इनके अलावा 9 हैंड ग्रेनेड, चार पिस्टल, 5 थुराया सेटेलाइट फोन, दो वायरलेस सेट के अलावा 10 लाख रुपये की नकली करेंसी और मैगजीन कारतूस भी पाकिस्तान से भेजी गए थे। इससे पहले एक ड्रोन 5 अगस्त को बरामद किया गया था।
10 अक्तूबर, 2019
फिरोजपुर में एक बार फिर पाकिस्तानी ड्रोन देखे गए। झुंझारा हजारा सिंह वाला के सीमावर्ती गांव में ग्रामीणों ने दो ड्रोन देखे। इसी हफ्ते के दौरान हुसैनीवाला सेक्टर में भी दो पाकिस्तानी ड्रोन भारतीय सीमा में घुसे। यह संदिग्ध ड्रोन बस्ती रामलाल की बॉर्डर आउट पोस्ट और हुसैनीवाला की एचके टावर पोस्ट के करीब देखे गए थे और एक किलोमीटर की ऊंचाई पर उड़ रहे थे। पहला ड्रोन 10 बजे से 10.40 बजे के बीच में देखा गया और दूसरा रात 12.25 बजे। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने दावा किया कि यह ड्रोन की चौकसी के चलते वापिस पाकिस्तान की तरफ मुड़ गए और कुछ ही देर बाद उनकी आवाज भी बंद हो गई। पंजाब पुलिस ने भी दावा किया कि यह ड्रोन भारतीय सीमा में कोई भी संदिग्ध वस्तु गिराने में नाकाम रहे।
एक अक्तूबर 2019
फाजिल्का के सीमावर्ती क्षेत्र में रात के समय पाकिस्तानी ड्रोन उड़ते देखे गए। यह ड्रोन कई बार भारतीय सीमा क्षेत्र में घुसे। हुसैनीवाला सेक्टर से सटे कई गांव के लोगों ने भी ड्रोन देखे जाने की पुष्टि की थी।