अगली बार उन्होंने एक बार फिर से पार्षद का चुनाव लड़ा और दोबारा जीतकर सर्वसम्मति से एक बार फिर नगर परिषद खरड़ के प्रधान चुने गए लेकिन उनकी सोच ऊंची थी, 2007 में प्रधान पद पर रहते ही उन्होंने श्री चमकौर साहिब से विधानसभा चुनाव लड़ने का मन बनाया लेकिन उन्हें किसी भी पार्टी ने टिकट नहीं दी लेकिन चुनाव लड़ने का मन बना चुके चरणजीत सिंह ने हार नहीं मानी और वह आजाद उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में उतर गए। इस चुनाव में उन्होंने अकाली उम्मीदवार सुखवंत कौर संधू को भारी वोटों से हरा दिया और यहीं से उनके नाम चरणजीत के साथ चन्नी जुड़ गया।
2012 में विधानसभा चुनावों में उन्हें कांग्रेस पार्टी ने टिकट दिया और वह दोबारा विधायक चुने गए। लोगों के दिलों में अपनी अच्छी पकड़ बना चुके चरणजीत चन्नी को 2017 के चुनावों में एक बार फिर कांग्रेस पार्टी ने चुनाव मैदान में उतारा, जहां उन्होंने एक बार फिर अपने आप को खरा साबित करते हुए लगातार तीसरी बार चुनाव जीता।
इस चुनाव के बाद उन्हें पंजाब मंत्रिमंडल में भी जगह मिली और वह पंजाब के कैबिनेट मंत्री बने। पढ़ने के शौकीन चरणजीत चन्नी आज भी देर रात तक कुछ न कुछ पढ़ते रहते हैं। कुछ दिनों से पंजाब की राजनीति में हो रही उथल-पुथल को भांपते हुए उन्होंने कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ बगावत के बोल बोलने शुरू कर दिए थे और कैप्टन के प्रबल विरोधी नवजोत सिंह सिद्धू को खुला समर्थन देना शुरू कर दिया था। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के नजदीकी माने जाने वाले चरणजीत सिंह चन्नी कब नवजोत सिंह सिद्धू के इतने नजदीक आ गए, यह उनके साथियों को भी पता नहीं चल सका।