प्रदेश में राइट टू हेल्थ को लागू करने की मांग वाली याचिका को हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने जनहित याचिका के तौर पर सुनवाई के लिए चीफ जस्टिस को रेफर कर दिया है। याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया गया कि प्रदेश के अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों के पद बड़ी संख्या में रिक्त पड़े हैं।
हरियाणा के अस्पतालों व स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों व स्टाफ की कमी बताते हुए प्रदेश में राइट टू हेल्थ को लागू करने की मांग वाली याचिका को हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने जनहित याचिका के तौर पर सुनवाई के लिए चीफ जस्टिस को रेफर कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश पर आधारित खंडपीठ अब इस पर जनहित याचिका के तौर पर सुनवाई करेगी।
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याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया गया कि प्रदेश के अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों के पद बड़ी संख्या में रिक्त पड़े हैं। याचिका में बताया कि कोरोना ने स्वास्थ्य प्रणाली की कमजोर कड़ियों को उजागर किया है। स्वास्थ्य सुविधाएं नागरिकों का अधिकार हैं और इससे उन्हें वंचित नहीं रखा जा सकता। रिक्त पड़े पदों के कारण लोगों को सही प्रकार से सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
अस्पतालों में अव्यवस्था का माहौल बनता है और इसका खामियाजा आम जन को भुगतना पड़ता है। सिंगल बेंच ने कहा कि यह मुद्दा व्यापक जनहित से जुड़ा हुआ है और ऐसे में इस पर जनहित याचिका के तौर पर ही सुनवाई की जानी चाहिए। ऐसे में सिंगल बेंच ने इसे जनहित याचिका के तौर पर सुनवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश को रेफर कर दिया।