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स्थायी रैन बसेरा का सपना अधर में लटका, वन विभाग ने बदले में मांगी भूमि व पेड़ों का खर्चा

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चंडीगढ़। शहर में आधुनिक स्थायी रैन बसेरा बनाने की योजना पर फिलहाल रोक लग गई है। सेक्टर-43 में जिस जगह नगर निगम को रैन बसेरा बनाना था, वह वन विभाग की भूमि है। वन विभाग ने योजना पर रोक लगाते हुए कहा है कि निगम पहले उन्हें उतनी ही भूमि कहीं और उपलब्ध कराए। साथ ही जितने पेड़ काटे जाएंगे, उनका खर्चा देकर नई जमीन पर उतने ही पौधे रोपने की व्यवस्था करे। ऐसा न कर पाने की स्थिति में निगम को नई जगह भूमि तलाशनी होगी।
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बता दें कि नगर निगम को हर साल सर्दियों में अस्थायी रैन बसेरा बनाकर करोड़ों रुपये खर्च करने पड़ते हैं, उसमें भी कई बार खामियां रह जाती हैं। इलाज से लेकर घूमने के लिए देशभर से लोग पहुंचते हैं। लोगों को कम दाम में ठहरने की व्यवस्था कराने के उद्देश्य से नगर निगम की ओर से सेक्टर-43 में स्थायी रैन बसेरा बनवाने की योजना को वर्ष 2019 में अनुमति मिली थी। लगभग 100 लोगों की क्षमता वाले इस रैन बसेरे में ओडीएफ प्लस प्लस के मानकों को पूरा करते हुए महिला, पुरुष व दिव्यांगों के लिए अलग-अलग शौचालय की व्यवस्था करने को कहा गया था। दीनदयाल अंत्योदय योजना के अंतर्गत निगम को केंद्र से फंड मिलना है। इसका डिजाइन तैयार करके केंद्र को भेजा जाना था, इसके बाद वहां से बजट स्वीकृत होना था, लेकिन वन विभाग की शर्तों ने इस योजना पर फिलहाल ब्रेक लगा दिया है।
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शहर में पांच स्थायी रैन बसेरे, प्रशासन को नहीं थी जानकारी
प्रशासन की ओर से शहर में पांच स्थायी रैन बसेरा बनाए गए हैं। इनमें से सेक्टर-17 में बने रेडक्रास के रैन बसेरे का निगम उपयोग करता है। वहीं सेक्टर-28 व 29 के रैन बसेरे में आईटीबीपी और सीआरपीएफ के जवान रहते हैं जबकि सेक्टर-25 स्थित ट्रक पार्किंग का रैन बसेरा बुरी हालत में है और मनीमाजरा स्थित रैन बसेरे में दिव्यांगों का डे स्कूल चलता है, जो एक एनजीओ के पास है। वर्ष 2019 में निगम ने जब प्रशासन के सामने रैन बसेरे की मांग रखी तब प्रशासन को जानकारी हुई कि सभी रैन बसेरे किसी न किसी को दिए जा चुके हैं।
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तीन साल में खाली नहीं करा सके रैन बसेरा
लगभग 25 साल पहले निगम ने सेक्टर-28 व 29 का रैन बसेरा में आईटीबीपी व सीआरपीएफ को दे दिया था। अब यह बिल्डिंग जर्जर हो चुकी है। स्थानीय बटालियन के प्रभारियों से प्रशासन ने बात की तो उनका कहना है कि अगर वह इसे खाली कर देंगे तो उनके जवान कहां रहेंगे इसलिए वह यहां से नहीं जा सकते हैं। उसके बाद बैठक में तय हुआ कि रक्षा मंत्रालय को पत्र लिखकर जवानों को अन्य जगह स्थानांतरित कराया जाएगा ताकि बिल्डिंग की मरम्मत कराई जा सके, नहीं तो बड़ा हादसा हो सकता है। तीन साल बीत गये प्रशासन इन भवनों को खाली नहीं करा सका है।
स्मार्ट सिटी को रोकने पउ़े थे प्रोजेक्ट-
सेक्टर-43 में 71 एकड़ जमीन वन विभाग की है। वर्ष 2000 में डीसी द्वारा वन मंत्रालय को एफिडेविट देकर यह भूमि उन्हें देे गई थी। वन विभाग की भूमि होने के कारण वर्ष 2019 में स्मार्ट सिटी लिमिटेड को 4,933 करोड़ का प्रोजेक्ट रद्द करना पड़ा था।
कोट
चीफ आर्किटेक्ट को दूसरी साइट देने के लिए फाइल भेजी है। वहां से जैसे ही फाइल स्वीकृत होगी, आगे की योजना पर काम शुरू हो जाएगा।
- आनिंदिता मित्रा, आयुक्त, नगर निगम
नगर निगम को जिस जगह रैन बसेरा बनाना है, वह वन विभाग की है। इसके लिए निगम को दूसरी जगह भूमि देनी होगी और जितने पेड़ लगे हैं, उन्हें काटने का खर्चा देना होगा।
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- देवेंद्र दलाई, मुख्य वन संरक्षक
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