नाकामियों से सीखने वाला ही सफल व्यक्ति कहलाता है। उद्योग के लिए विशेष तरह की मशीन डिजाइन करने वाले अनीश लौंगिया के आगे बढ़ने की कहानी कुछ यही सीख देती है। वे रिवर्स इंजीनियरिंग में माहिर हैं। यानी कि किसी मशीन को देखने के बाद उसमें नए बदलाव कर उसे बना देना। दो साल पहले उन्होंने इसी फील्ड में अपना स्टार्टअप शुरू किया।
ऐसे बहुत कम स्टार्टअप होते हैं, जो पहले दिन से कमाना शुरू कर दें। अनीश इनोवेशन में नाम और काम दोनों कमा रहे हैं। मैकेनिकल से बीटेक की डिग्री हासिल करने वाले अनीश बचपन से खिलौने को तोड़कर उसे जोड़ देने में माहिर थे। दसवीं क्लास में उन्हें कंप्यूटर से खेलना आ गया था।
घर की लाइटों को डिस्को लाइट में बदलना या नए तरह के लैंप बनाना उनके बाएं हाथ का काम था। जब बारी इंजीनियरिंग की पढ़ाई की आई तो नंबर इतने कम थे कि कोई भी इंजीनियरिंग कालेज उन्हें सीट नहीं देना चाहता था। किसी तरह से उन्हें मैनेजमेंट कोटे की सीट मिली। उनके पेरेंट्स खुश थे, लेकिन अनीश मायूस।
कॉलेज में टेक फेस्ट के दौरान उन्हें रोबोट बनाने की जिम्मेदारी दी गई। बस यही उनके लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ। रोबोट बनाने के लिए उन्हें किताबों की ओर लौटना पड़ा। पढ़ाई की ऐसी लगन लगी कि बीटेक के बाद एनआईटीटीटीआर चंडीगढ़ से एमटेक की डिग्री हासिल की। फिर नौकरी के बजाए खुद का काम करने की सोची।