चंडीगढ़। शहर में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए प्रशासन ने एक बड़ा फैसला लिया है। यह तय हुआ है कि वर्ष 2027 तक सीटीयू के बेड़े में ट्राइसिटी रूट पर चल रहीं सभी 358 बसों को इलेक्ट्रिक बस में बदल दिया जाएगा। अभी सीटीयू के पास सिर्फ डीजल बसें हैं, जो बड़ी मात्रा में कार्बन उत्सर्जित करती हैं। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि 13 नवंबर से इसकी शुरुआत हो जाएगी और चरणबद्ध तरीके से बसों को बदला जाएगा।
प्रशासन की कोशिश है कि शहर में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा मिले। इसके लिए प्रशासन एक इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी भी बना रहा है। इसके लिए कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। शहर में प्रदूषण मुक्त ई-वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में प्रशासन पहला कदम भी उठा चुका है। राज्य परिवहन प्राधिकरण (एसटीए) द्वारा अब सिर्फ ई-रिक्शा और ई-ऑटो को ही पंजीकृत किया जा रहा है और सवारियों को ढोने के लिए परमिट दिए जा रहे हैं। एलपीजी और सीएनजी ऑटो को अब नया परमिट नहीं दिया जा रहा है।
साथ ही शहर में चल रहे करीब 6000 सीएनसी-एलपीजी ऑटो को भी धीरे-धीरे ई-रिक्शा और ई-ऑटो से बदलने की तैयारी है। कुछ दिनों पहले एक सम्मेलन में प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल ने ये संकेत दिए थे कि प्रशासन आने वाले कुछ सालों में सिर्फ इलेक्ट्रिक गाड़ियों के ही पंजीकरण की मंजूरी दे सकता है।
अगले साल तक 80 बसों को बदलने की योजना
सीटीयू ने डीजल वाली बसों को बदलने की प्रक्रिया शुरू भी कर दी है। इस वर्ष केअंत कर 40 ई-बसें शहर पहुंच जाएंगी। इसके बाद अगले साल तक अतिरिक्त 40 ई-बसें आ जाएंगी। इसके लिए प्रशासन की तरफ से टेंडर भी जारी कर दिया है। पहली 40 बसों के लिए अशोक लेलैंड कंपनी से करार हुआ है। 13 नवंबर को 15 बसों के साथ प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित ई-बसों को हरी झंडी भी दिखा सकते हैं। इसके लिए परिवहन विभाग की तरफ से तैयारी की जा रही है। इन बसों में 36 लोगों के बैठने की जगह है और अधिकतम एक समय में 54 लोग सफर कर सकेंगे। एक बार चार्ज होने के बाद बस करीब 140 किलोमीटर चलेगी। एक दिन में बस 200 से 300 किमी तक चलेगी।