एडवोकेट धामी ने कहा कि अफगानिस्तान में सिख देश छोड़ रहे थे क्योंकि वह सुरक्षित नहीं हैं और जब सिख देश में नहीं रहेंगे तो श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की देखभाल कौन करेगा?"इसीलिए सिख भारत आने पर पवित्र श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को अपने साथ ला रहे थे।
धामी ने कहा कि तालिबान शासन को सिखों की भावनाओं के खिलाफ फैसला नहीं लेना चाहिए। एसजीपीसी प्रमुख ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले में हस्तक्षेप करने और सिखों की धार्मिक भावनाओं के खिलाफ अफगानिस्तान में तालिबान शासन द्वारा की जा रही कार्रवाई को रोकने की भी अपील की।
अफगानिस्तान में तालिबान शासन के बाद से सिखों समेत तमाम धार्मिक अल्पसंख्यकों पर बार-बार लक्षित हमले हो रहे हैं। हाल ही में अफगानिस्तान में सिखों पर हमलों की बाढ़ सी आ गई थी। इस साल 18 जून को इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत ने काबुल में करते परवान गुरुद्वारा साहिब पर हमला किया था। इसमें लगभग 50 लोगों की जान चली गई।
मार्च 2020 में काबुल के शॉर्ट बाजार इलाके में श्री गुरु हर राय साहिब गुरुद्वारा में एक घातक हमला हुआ था। इस हमले में 27 सिख मारे गए थे और कई घायल हो गए थे। इस्लामिक स्टेट के आतंकवादियों ने हमले की जिम्मेदारी ली थी। 2020 में अफगानिस्तान में लगभग 700 हिंदू और सिख थे लेकिन उनमें से बड़ी संख्या में 15 अगस्त 2021 को तालिबान के अधिग्रहण के बाद देश छोड़ दिया था।