एएसआई की हत्या करने के बाद कार गांव बूटां कपूरथला की ओर भगा ले गए। उन्हें पकड़ने के लिए जिले के सभी थानों की पुलिस ने नाकाबंदी कर दी और आरोपियों की कार लार्ड कृष्णा कॉलेज की ओर जाती दिखाई दी। इसके बाद पुलिस ने आरोपियों का पीछा जारी रखा। गांव नूरपुर लुबाना के समीप आरोपियों की कार बेकाबू होकर सड़क किनारे खड़ी ट्राली से जा टकराई।
इस पर आरोपी कार वहीं छोड़कर खेतों में घुस गए और पीछा कर रही पुलिस पार्टी पर जानलेवा फायरिंग शुरू कर दी। इसके जवाब में पुलिस कर्मचारियों ने भी फायरिंग की तो आरोपी गांव नुरपुर लुबाना की तरफ भागने लगे तो थाना ढिलवां के तत्कालीन एसएचओ जरनैल सिंह ने घेराबंदी की।
मगर आरोपी फायरिंग कर खेतों के रास्ते भागते गांव निजामपुर की तरफ आ गए और खेतों में छिप गए। पुलिस छानबीन में जुटी रही। इसी दौरान आरोपी एक पानी की टंकी पर चढ़ गए लेकिन जब उन्हें लगा कि उनके पास भागने का कोई रास्ता नहीं है तो उन्होंने टंकी से छलांग ला दी। इससे आरोपी जख्मी हो गए और पुलिस ने उन्हें दबोच लिया।
उनकी पहचान गुरप्रीत सिंह उर्फ गोपी निवासी तरनतारन, विजयपाल और गुरबाज सिंह निवासी खडूर साहिब तरनतारन के तौर पर हुई। इनके पास से पुलिस को कई रिवाल्वर, लूटी हुई सोने की वस्तुएं, मोबाइल और नकदी बरामद हुई थी। सरकारी वकील ने बताया कि सत्र न्यायाधीश अमरिंदर सिंह ने गैंगस्टर गुरप्रीत सिंह उर्फ गोपी, विजय पाल और गुरबाज सिंह को दोषी करार दिया और उम्रकैद की सजा सुनाई।