सुखबीर ने कहा कि वह जलालाबाद हलके से चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि एक बार अकाली दल और बसपा की सरकार बनने के बाद फिरोजपुर लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व करने के लिए राय सिख समुदाय से उम्मीदवार को उतारा जाएगा। इस मौके पर फाजिल्का ब्लॉक समिति की मौजूदा चेयरपर्सन बागोबाई और उनके पति कांग्रेस पार्टी को छोड़कर अकाली दल में शामिल हो गए। इस मौके पर फाजिल्का के उम्मीदवार हंस राज जोशन व अबोहर के उम्मीदवार मोहिंदर सिंह रिणवा के अलावा पार्टी के अन्य नेता मौजूद रहे।
श्री हरमंदिर साहिब में बेअदबी की कोशिश की घटना के लिए कांग्रेस जिम्मेदार: बादल
प्रकाश सिंह बादल ने कहा कि कांग्रेस व आम आदमी पार्टी दोनों ही प्रदेश का भला नहीं कर सकती। सूबे के हितों के बारे में सोचने वाली सिर्फ एक ही पार्टी है वो है शिअद। इस दौरान बादल ने सूबे की कानून-व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अमन-कानून नाम की कोई चीज नहीं है। असामाजिक तत्वों के हौसले इस कदर बुलंद हो चुके हैं कि बीते दिनों एक व्यक्ति श्री हरमंदिर साहिब में दाखिल होकर बेअदबी की कोशिश करता है। इस घटना के लिए कांग्रेस सीधे तौर पर जिम्मेदार है। चार दिनों में तीन डीजीपी बदल दिए गए हैं। रोज अधिकारी बदले जा रहे हैं। बादल ने कहा कि राज्य में नशा बढ़ गया है। बड़ी मात्रा में रोजाना नशा पकड़े जाने की घटनाएं सामने आ रही हैं। वेतन की बात करें तो मुलाजिमों का तो दूर विधायकों को भी अभी तक वेतन नहीं मिला है।
बादल होंगे सुखबीर के ऊपर सुपर मुख्यमंत्री, जो सिर्फ लंबी हलका संभालेंगे: हरसिमरत
हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि पहले तो प्रकाश सिंह बादल मुख्यमंत्री होने के नाते पूरा राज्य संभालते थे। मगर इस बार वे सुखबीर बादल के ऊपर सुपर मुख्यमंत्री होंगे जो सिर्फ लंबी हलका संभालेंगे। इस लिए लंबी के लोग बादल को मनाएं कि लंबी को सेवा के लिए उनकी जरुरत है। राज्य को चन्नी, केजरीवाल या राजा वड़िंग जैसे नेताओं का नेतृत्व नहीं बल्कि प्रकाश सिंह बादल जैसे नेता का नेतृत्व चाहिए।
हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि प्रदेश में जितने भी प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतरेंगे। प्रकाश सिंह बादल उन सब में सबसे ज्यादा अनुभव रखने वाले हैं। कांग्रेस पार्टी ने तो पंजाब को बहुत बुरे हालातों में छोड़ दिया है। प्रदेश के लोगों को प्रकाश सिंह बादल के 70 वर्षों के सियासी अनुभव का लाभ लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रकाश सिंह बादल के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए चुनाव मुहिम में चाहे वे वोट मांगने आएं या न आएं, मतदाताओं को उन्हें बहुमत से जिताने का विश्वास दिलाना है।