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कोरोना काल : देश में बढ़े खुदकुशी के मामले, हरियाणा में बीते साल की तुलना में केस घटे

Sat, 06 Nov 2021 12:02 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

कोरोना काल में पिछले साल देश में आत्महत्या के मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है। मगर हरियाणा में इन आंकड़ों में कमी आई है। जबकि पड़ोसी राज्य पंजाब में वर्ष 2020 में 2616 लोगों ने आत्महत्या की, जबकि वर्ष 2019 में यह संख्या 2357 थी। वहीं, केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में आत्महत्या का आंकड़ा क्रमश: 128 और 131 रहा।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
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कोरोना महामारी के दौर में जहां देश और दुनिया के लोग तनाव में आ गए थे, वहीं हरियाणा के लोगों ने बीमारी का हौसले से सामना किया। जहां देश में वर्ष 2020 में आत्महत्या के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई, वहीं हरियाणा में पिछले साल के बजाय मामलों में 4.5 प्रतिशत की कमी आई है। 

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राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी ) द्वारा जारी आंकड़े इस बात की तस्दीक करते हैं कि लॉकडाउन और वायरस संक्रमण दौर में भी प्रदेश के लोगों ने जीने की लालसा नहीं छोड़ी। रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा में वर्ष 2020 में कुल 4001 लोगों ने आत्महत्या की, यानी रोजाना औसतन 11 लोगों ने अपनी जान दी। इनमें से 3084 पुरुष और 917 महिलाएं रहीं। जबकि वर्ष 2019 में 4191 ने आत्महत्या की थी। इनमें से 3297 पुरुष और 894 महिलाएं थीं।  इस प्रकार, हरियाणा में इस संख्या में 190 की कमी आई है जो 4.5 प्रतिशत कम थी। 

रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल देश में 1 लाख 53 हजार 52 लोगों ने जान दी और आत्महत्या दर 11.3 रही। जबकि वर्ष 2019 में देश में 1 लाख 39 हजार 123 लोगों ने आत्महत्या की थी और आत्महत्या की दर 10.4 फीसदी थी। आत्महत्या करने के मुख्य कारणों में घरेलू परेशानियां, वैवाहिक संबंध, बीमारी आदि हैं। 
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आत्महत्या के प्रयास में दर्ज होगा धारा 309 के तहत केस: एडेवोकेट हेमंत
एडवोकेट हेमंत ने बताया कि आत्महत्या की कोशिश करने वाले के खिलाफ आईपीसी की धारा 309 में केस दर्ज किया जाता है। इसमें एक वर्ष तक का कारावास (जेल) या जुर्माना या दोनों दंड दिया जा सकता है। मानसिक स्वास्थ्य देखरेख अधिनियम, 2017 के तहत केंद्र एवं राज्य सरकारों का कर्तव्य है कि जिन्होंने आत्महत्या का प्रयास किया है, भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति को रोकने के लिए उसकी देखरेख, उपचार और पुनर्वास का उचित प्रबंध करे।  

कोरोना वायरस और लॉकडाउन के दौर में अकेलेपन से तनाव के मामले बढ़े। हरियाणा के लोगों का खानपान और रहन- सहन अन्य प्रदेशों के मुकाबले अलग है। यहां पर अभी भी संयुक्त परिवार की परंपरा है। इसलिए यहां के लोग इस बुरे दौर का भी मजबूती से मुकाबला कर पाए। -डॉ. विवेक गर्ग, मनोचिकित्सक। 

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