चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय डेढ़ साल से बंद है। अभी खोलने के लिए कोई आदेश जारी नहीं हुए। इसी को लेकर पीयू के छात्रों ने कहा है कि प्लेसमेंट का स्तर गिर रहा है। कंपनियां ऑनलाइन पढ़ाने वाले संस्थानों के पास कम पहुंच रही हैं। छात्रों को नौकरी मिले, इसके लिए जल्द से जल्द कैंपस खोला जाना चाहिए। इसके अलावा ऑफलाइन कक्षाएं शुरू करवाई जाएं, ताकि शिक्षा गुणवत्ता बेहतर हो सके।
पिछले साल मार्च में कोरोना के कारण लॉकडाउन लगा था। उसी के साथ कैंपस बंद कर दिया गया। उसके बाद से आज तक नहीं खोला गया। केवल शोधार्थियों को जरूर बुलाया गया, लेकिन इसके लिए उन्हें भी बड़ा संघर्ष करना पड़ा। शोधार्थी भी पूरे नहीं आ सके। सिर्फ परास्नातक के उन्हीं विद्यार्थियों को बुलाया गया जो शोध से जुड़े थे। पीयू में वर्तमान में कैंपस खोलने के लिए छात्र संघर्ष कर रहे हैं, क्योंकि कंपनियां ऑनलाइन पढ़ाई करने वाले छात्रों को कम नौकरी दे रही है। उनके सब्र का बांध कभी भी टूट सकता है। हालांकि पीयू कोरोना काल में भी अपना प्लेसमेंट बेहतर बता रही है।
कैंपस न खुला तो विद्यार्थियों को बड़ा नुकसान
एनएसयूआई के अध्यक्ष एवं इंजीनियरिंग के छात्र निखिल नरमेटा का कहना है कि उनके विभाग में प्रयोग बड़े महत्वपूर्ण होते हैं। पढ़ाई अभी ऑनलाइन ही चल रही है। यदि जल्द कैंपस नहीं खोला गया तो विद्यार्थियों को बड़ा नुकसान होगा। कंपनियां प्लेसमेंट के लिए कम आएंगी। छात्र प्रयोग पूरी तरह नहीं सीख पाएंगे। अन्य कक्षाओं के विद्यार्थियों को भी नुकसान हो रहा है।
कैंपस खोलने में पीयू न करे देरी
एबीवीपी के मीडिया प्रभारी शुभम भारद्वाज का कहना है कि कैंपस खोलने में पीयू को अब कोई देरी नहीं करनी चाहिए। अन्यथा छात्रों का भविष्य खतरे में होगा। बिना प्रशिक्षण पाए, वे बाजार में नौकरी के लिए जाएंगे तो नौकरियां नहीं मिलेंगी। विद्यार्थियों का सपना चकनाचूर हो रहा है।
ऑनलाइन शिक्षा की गुणवत्ता ठीक नहीं
छात्र हिमांशु शर्मा, विनोद सिंह आदि ने भी पीयू से कहा है कि ऑनलाइन शिक्षा की गुणवत्ता ठीक नहीं है। ऑफलाइन कक्षाएं लगवाएं। उन्होंने यह भी कहा है कि ऑनलाइन पढ़ाई के जरिए कोर्स समय पर पूरा नहीं हो पाएगा, इसलिए ऑफलाइन कक्षाएं लगवाएं।