मान ने दिखाया 2019 का पत्र
मुख्यमंत्री ने सदन में पिछली सरकार के दौरान संसदीय मामलों के मंत्री रहे ब्रह्म मोहिंद्रा की ओर से राज्यपाल को 23 नवंबर, 2019 को लिखा पत्र दिखाया, जिसमें उन्होंने राज्यपाल को 15वीं विधानसभा के नौवें सत्र के रूप में 26 नवंबर को विस्तारित सत्र बुलाने की जानकारी दी थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उस समय के राज्यपाल ने विस्तारित सत्र को लेकर कोई एतराज नहीं जताया था, जबकि मौजूदा राज्यपाल ने राष्ट्रपति से शिकायत करने की बात कही है। इससे पहले राज्यपाल अनुच्छेद 356 लगाने की बात भी कह चुके हैं। मान ने कहा कि वह राजभवन के साथ चल रही रोज-रोज की कड़वाहट को खत्म करना चाहते हैं। सरकार 30 अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट जाएगी। इस पर कांग्रेस के सदस्य परगट सिंह ने कहा कि राज्यपाल के मुद्दे पर कांग्रेस राज्य सरकार के साथ है और राजभवन के साथ रोज-रोज की खींचतान को खत्म करना चाहती है।
प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस का वेल में हंगामा
सदन में शुक्रवार को जैसे ही प्रश्नकाल शुरू हुआ, नेता प्रतिपक्ष प्रताप बाजवा ने स्पीकर से सवाल किया कि यह बताया जाए कि यह सत्र वैध है या अवैध? उन्होंने कहा कि राज्यपाल की ओर से सदन में बिल पेश करने की अनुमति नहीं देने से इस सत्र का कोई उद्देश्य नहीं रह गया है। सरकार को नए सिरे से सत्र बुलाना चाहिए। आखिर सरकार की क्या मजबूरी है? बाजवा ने स्पीकर से यह भी पूछा कि इस सत्र में क्या एसवाईएल के मुद्दे पर भी चर्चा कराई जाएगी? स्पीकर ने कहा कि यह सत्र पूरी तरह वैध है और उनके पास राज्यपाल की तरफ से कोई सूचना नहीं आई है। इसके बाद वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने कहा कि जब स्पीकर तय कर चुके हैं कि सत्र वैध है तो सवाल खड़े नहीं करने चाहिए। इस पर चीमा और कांग्रेस सदस्यों के बीच बहस हो गई, जिसमें सत्ता पक्ष के अन्य सदस्य भी शामिल हो गए। कांग्रेस सदस्य स्पीकर के खिलाफ नारेबाजी करते हुए वेल में पहुंच गए, जबकि स्पीकर ने उन्हें अनदेखा करते हुए प्रश्नकाल का कामकाज जारी रखा। पूरे प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस सदस्य वेल में नारेबाजी करते रहे।