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Punjab: स्कॉलरशिप घोटाले में छह अधिकारी बर्खास्त, निजी संस्थानों को दी SC-ST छात्रों के लिए आई छात्रवृत्ति

Fri, 17 Feb 2023 12:04 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

बर्खास्त किए गए चार अधिकारी सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग से, जबकि दो लोग वित्त विभाग से संबंधित हैं। बर्खास्त किए गए अधिकारियों में एक उपनिदेशक, एक डिप्टी कंट्रोलर, सेक्शन ऑफिसर, सुपरिंटेंडेंट और दो वरिष्ठ सहायक शामिल हैं।
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पंजाब सरकार ने 55.97 करोड़ के पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति घोटाले में शामिल छह अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया है। यह घोटाला पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान सामने आया था। बर्खास्त अधिकारियों में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के डिप्टी डायरेक्टर परमिंदर सिंह गिल, सुपरिंटेंडेंट राजिंदर चोपड़ा, सीनियर असिस्टेंट राकेश अरोड़ा और बलदेव सिंह शामिल हैं। दो अधिकारी वित्त विभाग से हैं। इनके नाम डिप्टी कंट्रोलर चरनजीत सिंह, सेक्शन ऑफिसर मुकेश भाटिया हैं। 
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घोटाले में पूर्व मंत्री साधु सिंह धर्मसोत का नाम आने पर पंजाब सरकार ने कहा कि जो भी इसमें शामिल होगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा। घोटाले के वक्त साधु सिंह सामाजिक न्याय मंत्री थे। इन दिनों वह आय से अधिक संपत्ति के मामले में जेल में बंद हैं।

वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने शुक्रवार को बताया कि कथित घोटाले में 55.97 करोड़ रुपये की गड़बड़ी शामिल है, जिसमें से 16 करोड़ रुपये उन कॉलेजों को अतिरिक्त भुगतान के रूप में दिए गए, जिनसे पैसा वसूल किया जाना था। 
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उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार ने इन संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय, उन्हें करोड़ों रुपये का लाभ पहुंचाया। मंत्री कौर ने कहा कि यह राशि भी वसूली जाएगी। एक सवाल के जवाब में कौर ने कहा कि पंजाब सतर्कता ब्यूरो इस पूरे मामले की जांच करेगा।
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कागजों में बनें इंस्टीट्यूट को दे दिए 39 करोड़ रुपये
केंद्र सरकार की ओर से 2019 में पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप योजना के लिए पंजाब सरकार को 303 करोड़ रुपये जारी हुए। इसमें 55.97 करोड़ रुपये के हिसाब-किताब की गड़बड़ी पाई गई है। इसकी आगे जांच करने पर पता चला कि 39 करोड़ रुपये ऐसे इंस्टीट्यूट को दे दिए गए, जो सिर्फ कागजों में थे। इससे 9 लाख 5 हजार 340 विद्यार्थी छात्रवृत्ति से वंचित रह गए। कैबिनेट मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि सरकार ने इस मामले में नौ कॉलेजों से रिकवरी भी की गई है।

सेवानिवृत्त न्यायाधीश ने की मामले की जांच
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. बलजीत कौर और वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने बताया कि अगस्त 2020 में तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव कृपा शंकर सरोज ने विभाग में अनियमितताओं को लेकर मुख्य सचिव को रिपोर्ट सौंपी, जिसके बाद सेवानिवृत्त न्यायाधीश बीआर बंसल को जांच का जिम्मा सौंपा गया। जुलाई 2022 में मान सरकार ने सत्ता में आने के बाद पूरे मामले की विभागीय जांच की रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय में तलब की।

2.50 लाख छात्रों ने किया आवेदन
वित्त मंत्री चीमा ने कहा कि छात्रवृत्ति योजना के लिए आवेदन करने वाले छात्रों की संख्या पिछले वर्षों की तुलना में 2021-22 में घटकर 1.95 लाख रह गई है, क्योंकि पात्र छात्रों को धनराशि का वितरण नहीं किया गया है। इस बार 2.50 लाख अनुसूचित जाति के छात्र अब तक इस योजना के लिए आवेदन कर चुके हैं। पोर्टल 31 मार्च तक छात्रों के लिए खुला है और यह आंकड़ा तीन लाख के आंकड़े को पार करने की उम्मीद है।
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