कागजों में बनें इंस्टीट्यूट को दे दिए 39 करोड़ रुपये
केंद्र सरकार की ओर से 2019 में पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप योजना के लिए पंजाब सरकार को 303 करोड़ रुपये जारी हुए। इसमें 55.97 करोड़ रुपये के हिसाब-किताब की गड़बड़ी पाई गई है। इसकी आगे जांच करने पर पता चला कि 39 करोड़ रुपये ऐसे इंस्टीट्यूट को दे दिए गए, जो सिर्फ कागजों में थे। इससे 9 लाख 5 हजार 340 विद्यार्थी छात्रवृत्ति से वंचित रह गए। कैबिनेट मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि सरकार ने इस मामले में नौ कॉलेजों से रिकवरी भी की गई है।
सेवानिवृत्त न्यायाधीश ने की मामले की जांच
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. बलजीत कौर और वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने बताया कि अगस्त 2020 में तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव कृपा शंकर सरोज ने विभाग में अनियमितताओं को लेकर मुख्य सचिव को रिपोर्ट सौंपी, जिसके बाद सेवानिवृत्त न्यायाधीश बीआर बंसल को जांच का जिम्मा सौंपा गया। जुलाई 2022 में मान सरकार ने सत्ता में आने के बाद पूरे मामले की विभागीय जांच की रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय में तलब की।
2.50 लाख छात्रों ने किया आवेदन
वित्त मंत्री चीमा ने कहा कि छात्रवृत्ति योजना के लिए आवेदन करने वाले छात्रों की संख्या पिछले वर्षों की तुलना में 2021-22 में घटकर 1.95 लाख रह गई है, क्योंकि पात्र छात्रों को धनराशि का वितरण नहीं किया गया है। इस बार 2.50 लाख अनुसूचित जाति के छात्र अब तक इस योजना के लिए आवेदन कर चुके हैं। पोर्टल 31 मार्च तक छात्रों के लिए खुला है और यह आंकड़ा तीन लाख के आंकड़े को पार करने की उम्मीद है।