समूचे ऑपरेशन की निगरानी साइबर क्राइम के एआईजी (स्टेट) इंदरबीर सिंह और साइबर क्राइम के डीएसपी (स्टेट) समरपाल सिंह ने की। उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई में सब-इंस्पेक्टर विकास भाटिया ने भी अहम भूमिका निभाई। शुक्ला ने बताया कि छह साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी से फेसबुक हैकिंग, ओएलएक्स/बैंक धोखाधड़ी और अन्य साइबर क्राइम से संबंधित अपराधों से जुड़े अन्य मामलों को सुलझाने में सहायता मिलेगी।
पांच राज्यों के साइबर अपराधियों की आपस में साठगांठ
एडीजीपी शुक्ला ने कहा कि मध्य प्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान के साइबर अपराधी आपस में एक-दूसरे से जुड़े हैं और अलग-अलग राज्यों में अपनी गतिविधियों को अंजाम देते हैं। आरोपी तीन राज्यों हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में धोखाधड़ी की गतिविधियों को अंजाम देते रहे हैं। इसके अलावा पुलिस टीम ने आरोपी नरिंदर सिंह का पता लगाया है, जिसके खाते में गैर-कानूनी पैसा जमा किया गया था और उसे राजस्थान के भरतपुर से गिरफ्तार किया गया है।
नकली दस्तावेजों से खोलते थे बैंक खाते
शुक्ला ने बताया कि जांच से गिरोह के एक और सदस्य गुलाब सिंह को पकड़ा गया। इससे इस क्षेत्र में एक बड़े रैकेट का खुलासा हुआ, जहां अलग-अलग लोगों से एटीएम कार्ड किराए पर लेकर या नकली पहचान पत्रों द्वारा बैंक खाते खोलने का धंधा चलता था। इन बैंक खातों को अलग-अलग घोटालों जैसे ओएलएक्स, फेसबुक, सेक्स घोटाले और किसी भी किस्म के नाजायज पैसे या धोखाधड़ी से कमाए गए पैसे को रखने में इस्तेमाल किया जाता था। पूरे रैकेट में कुछ बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से भी इनकार नहीं किया जा सकता।