इस बार शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आ रही हैं। हाथी भगवान गणेश जी का स्वरूप है। इसलिए यह नवरात्र मंगलमय रहेगा। वर्ष 2023 का शारदीय नवरात्र चंद्रग्रहण से पहले आ रहा है।
माता का हाथी पर सवार होकर आना और चंद्र ग्रहण से पहले नवरात्र के संयोग से महा अधियोग बन रहा है। यह योग 26 वर्षों के बाद आ रहा है। यह कहना है सेक्टर 30 के श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख और कर्मकांडी पंडित बीरेंद्र नारायण मिश्र का।
यह भी पढ़ें: Chandigarh: पंजाब-हरियाणा में जल रही पराली से चंडीगढ़ की में घुल रहा ‘जहर’, एक्यूआई 136 पहुंचा
15 अक्तूबर से शुरू होंगे नवरात्र
शारदीय नवरात्र पर्व का प्रारंभ 15 अक्तूबर दिन रविवार से होगा। उन्होंने बताया कि 14 अक्तूबर दिन शनिवार की रात 11 बजकर 26 मिनट से प्रतिपदा प्रारंभ होकर 15 अक्तूबर को रात 12 बजकर 33 मिनट पर समाप्त हो रही है। 14 अक्तूबर दिन शनिवार को शाम 4 बजकर 25 मिनट पर चित्रा नक्षत्र शुरू होगा। यह नक्षत्र रविवार को शाम 6 बजकर 12 मिनट तक है। यदि चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग हो तो उस समय कलश स्थापन का निषेध है, लेकिन शास्त्रों में ऐसा निर्णय है कि चित्रा नक्षत्र के तीसरे चरण से चौथे चरण तक कलश स्थापना की जा सकती है।
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
वैधृति योग 15 अक्तूबर को सुबह 10 बजकर 24 मिनट तक है। ऐसे में कलश स्थापना का मुहूर्त सुबह 10 बजकर 25 मिनट के बाद है। सबसे शुभ मुहूर्त सुबह 11.35 बजे से लेकर दोपहर 12.40 बजे (अभिजीत मुहूर्त) तक है। श्री देवालय पूजक परिषद के अध्यक्ष और सेक्टर 18 के श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी पंडित डॉ लाल बहादुर दुबे ने बताया कि इस वर्ष नवरात्र में पूरे नौ दिनों तक मां की आराधना होगी। इस बार नवरात्र में तिथि क्षय नहीं है। नवरात्र में मां की पूजा से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
नवरात्र की तिथियां...
प्रथम नवरात्र 15 अक्तूबर
द्वितीय नवरात्र 16 अक्तूबर
तृतीय नवरात्र 17 अक्तूबर
चतुर्थ नवरात्र 18 अक्तूबर
पांचवा नवरात्र 19 अक्तूबर
छठा नवरात्र 20 अक्तूबर
सातवां नवरात्र 21 अक्तूबर
अष्टम नवरात्र 22 अक्तूबर
नवम नवरात्र 23 अक्तूबर